पुराना राज या नई चाल? चीन का बड़ा दावा कहा भारत-पाकिस्तान के बीच मैंने रुकवाई थी जंग
News India Live, Digital Desk : पड़ोसी देशों के रिश्तों की कहानी अक्सर बंद कमरों में लिखी जाती है, और जब ये खबरें सालों बाद बाहर आती हैं, तो दुनिया चौंक जाती है। इस वक्त चर्चा में है चीन का वो दावा, जिसमें उसने खुद को भारत और पाकिस्तान के बीच एक 'शांतिदूत' (Mediator) के तौर पर पेश किया है। मामला जुड़ा है 'ऑपरेशन सिंदूर' से, जिसमें चीन का कहना है कि उसने दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए पर्दे के पीछे से बड़ी भूमिका निभाई थी।
ये 'ऑपरेशन सिंदूर' आख़िर क्या है?
इसे समझने के लिए थोड़ा गहराई में उतरना होगा। अक्सर समुद्री सरहद या किसी खास नौसैनिक हलचल को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव के हालात बन जाते हैं। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी स्थिति ऐसी ही थी जब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के आमने-सामने आ गई थीं और खतरा एक बड़े युद्ध का था। उस वक्त क्या हुआ, इस पर आधिकारिक खबरें तो कम आईं, लेकिन चीन अब जो कह रहा है, वो भारतीय कूटनीति (Diplomacy) के लिहाज़ से बड़ा सवाल खड़ा करता है।
ड्रैगन का बड़ा दावा और उसकी मंशा
चीन का कहना है कि उसने दोनों देशों के टॉप लेवल अधिकारियों के बीच कड़वाहट को खत्म करने और हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के लिए दबाव डाला था। गौर करने वाली बात ये है कि भारत हमेशा से 'तीसरे पक्ष की मध्यस्थता' का विरोधी रहा है, खासकर जब मामला पाकिस्तान से जुड़ा हो। ऐसे में चीन का यह बयान देना कि वह 'बिचौलिया' था, कहीं न कहीं खुद को दक्षिण एशिया का बेताज बादशाह साबित करने की एक कोशिश नज़र आती है।
क्या सच में किसी 'सहारे' की जरूरत थी?
भारत का रिकॉर्ड रहा है कि वह अपनी लड़ाई खुद लड़ना जानता है, चाहे वो युद्ध का मैदान हो या टेबल पर होने वाली बातचीत। एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन का यह दावा महज एक 'नेरेटिव' (कथानक) हो सकता है ताकि वह ग्लोबल लेवल पर अपनी छवि एक शांतिप्रिय देश की बना सके। हकीकत तो ये है कि खुद चीन के भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ अलग-अलग तरह के स्वार्थ जुड़े हैं। जहाँ पाकिस्तान उसका पुराना यार है, वहीं भारत उसका सबसे बड़ा कंपटीटर।
बदलते समय की नई चाल
साल 2025 और अब 2026 की शुरुआत में हम देख रहे हैं कि चीन दुनिया भर के विवादों (जैसे ईरान-सऊदी अरब) को सुलझाने में अपनी दिलचस्पी दिखा रहा है। 'ऑपरेशन सिंदूर' का किस्सा छेड़कर वह शायद यह जताना चाहता है कि अगर वो न होता, तो एशिया का नक्शा आज कुछ और होता। लेकिन जानकार पूछते हैं कि क्या चीन जैसा मुल्क, जिसका खुद भारत के साथ सीमा पर पुराना विवाद है, वह वाकई एक 'निष्पक्ष' मध्यस्थ हो सकता है?