Rajasthan Visit : अपना घर छोड़कर पड़ोस में भीख क्यों मांगते हो? धीरेंद्र शास्त्री ने राजस्थान में दिखाई हिंदुओं को आइना
News India Live, Digital Desk : बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जब भी बोलते हैं, तो उनकी बातें सीधी दिल पर लगती हैं। उनके शब्द कड़वे जरूर हो सकते हैं, लेकिन उनके पीछे की भावना अक्सर अपने धर्म और संस्कृति को जगाने की होती है। हाल ही में राजस्थान की पावन धरा (सीकर) पर उन्होंने कुछ ऐसा कहा है, जो हर उस हिंदू को सोचने पर मजबूर कर देगा, जो आस्था के नाम पर यहां-वहां भटक रहा है।
बाबा को किस बात की है पीड़ा?
सीकर में लाखों की भीड़ के बीच धीरेंद्र शास्त्री का एक अलग ही रूप देखने को मिला। उनके चेहरे पर दुख साफ झलक रहा था। उन्होंने बहुत भावुक होकर कहा, "मेरा दिल तब दुखता है, जब मैं हिंदुओं को किसी 'दूसरी जगह' जाकर चादर चढ़ाते और सिर झुकाते देखता हूँ।"
उनकी टीस इस बात को लेकर थी कि सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी-देवता हैं। हमारे पास राम हैं, कृष्ण हैं, सालासार बालाजी हैं, और खाटू श्याम बाबा जैसे लखदातार हैं। फिर भी, हिंदू समाज के कुछ लोग अपनी थाली का घी छोड़कर, दूसरों के घर उम्मीद लेकर क्यों जाते हैं?
"अपने बाप को भूल गए?"
बाबा बागेश्वर का अंदाज हमेशा देसी और बेबाक होता है। उन्होंने लोगों को झकझोरते हुए सवाल किया कि अगर आपके घर में समर्थ पिता मौजूद है, तो पड़ोसी के आगे हाथ फैलाने की क्या जरूरत? उनका कहना है कि हिंदू 'भोले' बहुत हैं, उन्हें कोई भी बरगला देता है।
उन्होंने साफ लफ्जों में कहा कि जो हिंदू, सनातनी होकर भी अपनी परंपराओं का मान नहीं रखते, और दूसरी जगहों पर माथा टेकते फिरते हैं, वो दरअसल अपने ही धर्म का अपमान कर रहे हैं।
सनातनियों, जागो!
धीरेंद्र शास्त्री ने वहां मौजूद जनसमूह से कहा कि यह समय 'कुंभकरण की नींद' सोने का नहीं है। उन्होंने कहा, "मैं तुम्हें जगाने आया हूँ।" उनकी इस यात्रा में उनका स्पष्ट संदेश यही है कि जाति-पाति में बंटना छोड़ो और 'कट्टड़ सनातनी' बनो। जब तक हिंदू एक नहीं होंगे, तब तक ऐसी ही विडंबनाएं देखने को मिलेंगी।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
बाबा का यह बयान जंगल में आग की तरह फ़ैल गया है। कुछ लोग इसे विवादित बता रहे हैं, तो वहीं एक बड़ा तबका उनकी बातों का समर्थन कर रहा है। लोगों का कहना है कि जब अपना धर्म इतना समृद्ध है, तो हमें अपनी जड़ों को सींचना चाहिए, न कि दूसरों की नकल करनी चाहिए। खैर, धीरेंद्र शास्त्री ने जो चिंगारी सुलगा दी है, वो इतनी जल्दी ठंडी होने वाली नहीं है।