Rajasthan Road Safety : 45% ट्रक ड्राइवरों की आँखें कमजोर, और हम इसे नज़रअंदाज़ कर रहे हैं ये आंकड़े खतरे की घंटी हैं
News India Live, Digital Desk: जब हम नेशनल हाईवे पर सफ़र करते हैं, तो अक्सर ट्रक हमें डर का एहसास दिलाते हैं। भारी-भरकम ट्रकों को देख कर हम थोड़ा बचकर चलते हैं। रोड एक्सीडेंट (सड़क दुर्घटना) के बारे में जब भी बात होती है, तो ओवरस्पीडिंग या गलत ड्राइविंग को वजह माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बड़े हादसों की एक ऐसी वजह भी हो सकती है जिसे हम आमतौर पर नज़रअंदाज़ कर देते हैं?
जी हाँ! राजस्थान से आई एक हालिया रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 45 प्रतिशत ट्रक ड्राइवर आंखों की समस्याओं (Weak Eyesight) से जूझ रहे हैं!
क्या कहता है ये चौंकाने वाला डेटा?
परिवहन विभाग और उनसे जुड़ी एजेंसियों ने जब राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में ट्रक ड्राइवर्स का स्वास्थ्य परीक्षण किया, तो सच्चाई सामने आई। 45% ड्राइवर्स की विज़न यानी देखने की क्षमता ड्राइविंग के लिए ज़रूरी मानक (Standard) से बहुत कम पाई गई।
यानी, वे दूर के वाहन, साइन बोर्ड या रात के अंधेरे में सही तरीके से सड़क को नहीं देख पा रहे थे, फिर भी गाड़ी चला रहे थे।
इससे कितना बड़ा खतरा है?
एक ट्रक ड्राइवर 12 से 14 पहियों वाला एक बड़ा वाहन घंटों चलाता है। अगर उसे थोड़ी भी धुंधलाहट महसूस हो रही है या उसे रात में सही से नहीं दिख रहा, तो वो अपने लिए ही नहीं, बल्कि हाईवे पर चल रहे हजारों अन्य लोगों के लिए भी 'काल' बन जाता है। मामूली चूक भी बड़े एक्सीडेंट में बदल सकती है।
ड्राइवर क्यों छुपा रहे हैं ये बात?
इसका सबसे बड़ा कारण है 'डर' और 'लापरवाही':
- रोजी-रोटी जाने का डर: ड्राइवर्स को डर रहता है कि अगर उन्होंने अपनी आँखों की कमजोरी बता दी, तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा।
- जागरूकता की कमी: बहुत से ड्राइवर्स यह नहीं जानते कि ड्राइविंग लाइसेंस बनवाते समय सिर्फ साधारण आई चेकअप नहीं, बल्कि प्रोफेशनल जांच ज़रूरी है। उन्हें यह भी नहीं पता कि कमज़ोर नज़रों के लिए चश्मा लगाना उनकी मजबूरी नहीं, उनकी सुरक्षा है।
आगे क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
यह डेटा सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। अब शायद बड़े स्तर पर ट्रक ड्राइवर्स के अनिवार्य 'हेल्थ और आई चेकअप' (Mandatory Eye Checkup) कैंप लगाए जाएंगे। लाइसेंस रिन्यूअल के नियमों को भी और सख्त किया जा सकता है ताकि बिना पूरी तरह फिट हुए किसी को ड्राइविंग न करने दी जाए।