Chhattisgarh : देश में गौ-विरोधी सरकार मंजूर नहीं 5 राज्यों के चुनाव पर शंकराचार्य का बड़ा एलान
News India Live, Digital Desk : तीन दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुँचे शंकराचार्य ने पत्रकारों से बात करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों और गौ-रक्षा के मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि गौ-रक्षा केवल चुनावी नारा नहीं, बल्कि हिंदू धर्म की आत्मा है और जो राजनीतिक दल इस पर स्पष्ट रुख नहीं रखते, उन्हें सत्ता में रहने का नैतिक अधिकार नहीं है।
शंकराचार्य के संबोधन के 5 मुख्य बिंदु
चुनाव और गौ-नीति: 5 राज्यों के आगामी चुनावों पर उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे दलों का बहिष्कार करना चाहिए जो सत्ता में आने के बाद गौ-वध रोकने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा, "भारत जैसे देश में गौ-विरोधी सरकार का होना दुर्भाग्यपूर्ण है।"
हिंदू सरकार की परिभाषा: छत्तीसगढ़ी में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि जो सरकार गाय को "गौ माई" कहकर सम्मान नहीं दे सकती और उसे केवल एक 'पशु' मानती है, उसे 'हिंदू सरकार' कहना कठिन है।
योजनाओं पर सवाल: उन्होंने पिछली सरकारों की गौ-संरक्षण योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि केवल गौठान बनाना या कागजी योजनाएं शुरू करना पर्याप्त नहीं है। गाय को 'राष्ट्र माता' का दर्जा मिलना चाहिए।
सख्त कानून की मांग: उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि गौ-हत्या को एक जघन्य अपराध घोषित किया जाए और इसके लिए फांसी की सजा जैसा कड़ा कानून बनाया जाए।
किसी दल का समर्थन नहीं: शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे किसी विशेष राजनीतिक दल (भाजपा, कांग्रेस या अन्य) के एजेंट नहीं हैं। वे केवल उस दल के साथ खड़े होंगे जो गौ-रक्षा के लिए 'ठोस संकल्प पत्र' जारी करेगा।
81 दिवसीय 'गविष्ठि यात्रा' का एलान
शंकराचार्य ने हाल ही में लखनऊ में भी अपनी 'गो प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध' यात्रा के समापन पर एक और बड़ी घोषणा की थी:
अभियान: आगामी 3 मई, 2026 से गोरखपुर से 81 दिनों की 'गविष्ठि यात्रा' शुरू होगी।
उद्देश्य: उत्तर प्रदेश के 1.08 लाख गांवों में जाकर लोगों को गौ-संरक्षण के प्रति जागरूक करना और सरकारों पर दबाव बनाना।