स्वाद के चक्कर में दिल से समझौता मत कीजिये,आज से ही बदल लें रसोई के ये 5 पुराने नियम

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News India Live, Digital Desk : नए साल 2026 की आप सबको ढेरों बधाई। आज की शुरुआत हम अपनी सेहत की बात से करते हैं। हम अक्सर अखबारों और सोशल मीडिया पर पढ़ते हैं कि आजकल जिम में एक्सरसाइज करने वाले फिट नौजवानों को भी हार्ट अटैक आ रहा है। इसका एक बहुत बड़ा कारण हमारे रसोई घर में छिपा है।

भारत में हमारे यहाँ तेल, मसाले और चीनी का जो तालमेल है, वो दुनिया में सबसे लाजवाब माना जाता है, पर यही तालमेल कभी-कभी 'खामोश काatil' (Silent Killer) साबित होता है।

वो गहरे तले हुए स्नैक्स: सिर्फ स्वाद नहीं, रिस्क भी
शाम की चाय के साथ जब तक गरमागरम पकौड़े या समोसे न हों, मज़ा नहीं आता। पर क्या आपको पता है कि जब हम किसी तेल को बार-बार गरम करके उसमें चीज़ें तलते हैं, तो वह तेल ट्रांस-फैट (Trans-fat) में बदल जाता है। ये वही विलेन है जो हमारी धमनियों (Arteries) में जाकर जम जाता है और खून का रास्ता रोक देता है। नतीजा? सीधा असर हमारे दिल की धड़कन पर पड़ता है।

मैदा और रिफाइंड आटा: आंतों और दिल का दुश्मन
बाज़ार में मिलने वाले पिज्जा, कुलचे या भटूरे हों ये सब मैदा (Maida) से बनते हैं। मैदा शरीर में जाकर न केवल सुस्ती बढ़ाता है बल्कि बैड कोलेस्ट्रॉल को भी न्यौता देता है। जब हम ज़्यादा रिफाइंड चीज़ें खाते हैं, तो हमारे शरीर का 'इंसुलिन रिस्पॉन्स' बिगड़ने लगता है, जो अंत में हार्ट डिजीज का बड़ा कारण बनता है।

चीनी की 'मीठी' मार
मिठाइयों के बिना हमारा कोई काम नहीं होता। रसगुल्ले हों या बर्फी, भारतीय मिठाइयों में चीनी और खोए का जो मेल है, वो सीधे हमारे वजन और शुगर लेवल पर असर करता है। बढ़ा हुआ वजन हमारे दिल पर दबाव बढ़ाता है, जिससे वह कम उम्र में ही थकने लगता है।

नमक की वो ज़्यादा मात्रा
सिर्फ़ चीनी ही नहीं, नमक भी कम खतरनाक नहीं है। हममें से कई लोगों को खाने के ऊपर से नमक छिड़कने या ढेर सारा अचार-पापड़ खाने की आदत होती है। ज़्यादा सोडियम का मतलब है 'हाई ब्लड प्रेशर', और बढ़ा हुआ बीपी सीधे तौर पर दिल के दौरे को ट्रिगर करता है।

अंत में बस इतना...
इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि आप खाना छोड़ दें। बस इतना ध्यान रखें कि अपनी थाली में रंगों को शामिल करें—मतलब हरी सब्जियां और फल। बाज़ार की चीज़ों से ज्यादा घर के बने ताजे खाने पर भरोसा करें। साल 2026 का पहला संकल्प क्यों न यही लें कि हम अपने 'दिल' का ख्याल एक नन्हे बच्चे की तरह रखेंगे।

याद रखिये, सेहत है तो ही साल 2026 की इन खुशियों का असली मज़ा है।