दिग्विजय सिंह की बढ़ी मुश्किलें RSS पर टिप्पणी मामले में ठाणे कोर्ट का बड़ा फैसला,मानहानि केस से राहत देने से इनकार
News India Live, Digital Desk: कांग्रेस के कद्दावर नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ की गई उनकी एक पुरानी टिप्पणी को लेकर चल रहे मानहानि के मामले में ठाणे की एक अदालत ने उन्हें बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज मामले को खारिज करने की याचिका को सिरे से नकार दिया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ें साल 2018 में दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए एक बयान से जुड़ी हैं। सिंह ने कथित तौर पर आरएसएस को लेकर कुछ विवादित टिप्पणियां की थीं, जिसे संघ की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया गया। इसी के बाद ठाणे में एक स्थानीय आरएसएस कार्यकर्ता ने उनके खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी।
कोर्ट ने क्या कहा?
दिग्विजय सिंह के वकीलों ने तर्क दिया था कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और इसे जारी रखने का कोई ठोस आधार नहीं है। हालांकि, ठाणे की कोर्ट ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना।
याचिका खारिज: कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामले में सुनवाई जारी रखने के पर्याप्त सबूत हैं।
ट्रायल का सामना: इस फैसले का मतलब है कि दिग्विजय सिंह को अब इस मानहानि मामले में नियमित ट्रायल (मुकदमे) का सामना करना पड़ेगा।
दिग्विजय सिंह की 'विवादित' टिप्पणियों का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह अपने बयानों के कारण कानूनी मुश्किलों में घिरे हों। वह अक्सर हिंदू राष्ट्रवाद और संघ की विचारधारा पर कड़े हमले करने के लिए जाने जाते हैं। जानकारों का मानना है कि इस बार कानूनी शिकंजा उनके लिए चुनावी या राजनीतिक रूप से परेशानी का सबब बन सकता है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
कोर्ट के इस फैसले के बाद भाजपा और आरएसएस समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश करार दे रही है। कानूनी विशेषज्ञों की मानें तो यदि मानहानि साबित होती है, तो सिंह को जुर्माने या जेल की सजा तक हो सकती है, जो उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ा मोड़ होगा।