सुप्रीम कोर्ट का हंटर एक्टिंग DGP की नियुक्ति पर राज्यों को लगी कड़ी फटकार

Post

News India Live, Digital Desk : देश की सर्वोच्च अदालत ने राज्यों में पुलिस प्रमुखों यानी डीजीपी (DGP) की नियुक्ति को लेकर चल रहे 'खेल' पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राज्य सरकारें अपनी पसंद के अधिकारियों को पद पर बनाए रखने के लिए 'एक्टिंग डीजीपी' (कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक) का जो रास्ता अपना रही हैं, वह कानून का उल्लंघन है।

क्या है पूरा मामला?

सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि कई राज्य सरकारें यूपीएससी (UPSC) को पैनल भेजने के बजाय महीनों तक कार्यवाहक डीजीपी से काम चलाती हैं। कोर्ट ने इसे 'प्रकाश सिंह बनाम भारत सरकार' मामले में दिए गए ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों की अवहेलना बताया।

कोर्ट की तीखी टिप्पणियां: "पसंदीदा अफसरों के लिए शॉर्टकट नहीं चलेगा"

चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य सरकारों को चेतावनी देते हुए कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं:

स्थायी नियुक्ति अनिवार्य: राज्यों को डीजीपी के रिटायर होने से कम से कम 3 महीने पहले यूपीएससी को नामों का प्रस्ताव भेजना होगा।

तदर्थ नियुक्तियों पर रोक: 'एक्टिंग डीजीपी' की नियुक्ति केवल असाधारण परिस्थितियों में बहुत कम समय के लिए हो सकती है, इसे स्थायी व्यवस्था नहीं बनाया जा सकता।

सीधी चेतावनी: कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य प्रक्रिया में देरी करते हैं, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा।

'एक्टिंग DGP' के पीछे का खेल?

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य सरकारें अक्सर यूपीएससी की चयन प्रक्रिया से बचने के लिए एक्टिंग डीजीपी नियुक्त करती हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि वे अपने 'पसंदीदा' अधिकारी को पुलिस बल की कमान सौंप सकें, जो शायद यूपीएससी के मानदंडों (अनुभव, सर्विस रिकॉर्ड और वरिष्ठता) पर फिट न बैठता हो।

प्रकाश सिंह जजमेंट का महत्व

2006 में सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस सुधारों को लेकर जो फैसला दिया था, उसमें डीजीपी का कार्यकाल कम से कम 2 साल सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। इसका मकसद पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करना था। एक्टिंग डीजीपी की व्यवस्था इस सुधार की मूल भावना को ही खत्म कर देती है।

अब राज्यों को क्या करना होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद अब उत्तर प्रदेश, पंजाब और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों (जहां कार्यवाहक डीजीपी की चर्चा रही है) को जल्द ही यूपीएससी के माध्यम से स्थायी पैनल तैयार करना होगा। ऐसा न करने पर संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है।