राक्षस होकर भी साधु? केतु के पास आखिर ऐसी क्या ताकत है जो दिलाती है मोक्ष?
News India Live, Digital Desk : ज्योतिष की दुनिया में जब भी 'राहु' और 'केतु' का नाम आता है, तो अच्छे-अच्छे लोगों के पसीने छूट जाते हैं। इन्हें पापी ग्रह या 'छाया ग्रह' माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि इनमें से एक, यानी केतु (Ketu), को ज्योतिष शास्त्र में 'मोक्ष कारक' (Salvation giver) कहा गया है?
यह बात सुनने में थोड़ी अजीब लगती है। एक असुर (राक्षस), जिसका काम लोगों को डराना या भटकना होना चाहिए, वो भला लोगों को मुक्ति या मोक्ष का रास्ता क्यों दिखाएगा? आइए, इसके पीछे का तर्क बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं।
सिर नहीं है, इसलिए लालच नहीं है
केतु के इस स्वभाव को समझने के लिए हमें समुद्र मंथन की कहानी याद करनी होगी। जब भगवान विष्णु ने अपने चक्र से स्वरभानु नाम के असुर का सिर काट दिया था, तो दो हिस्से बने।
- सिर बना राहु: जिसके पास आंखें हैं, जीभ है और दिमाग है। इसलिए राहु हमेशा चीजों को पाना चाहता है, भोगना चाहता है और कभी संतुष्ट नहीं होता।
- धड़ बना केतु: केतु के पास सिर ही नहीं है। न आंखें हैं दुनिया की चमक-धमक देखने के लिए, न जीभ है स्वाद लेने के लिए, और न ही दिमाग है जो साजिशें रचे।
चूंकि केतु के पास बाहरी दुनिया से जुड़ने का कोई जरिया (Senses) ही नहीं बचा, इसलिए वह खुद-ब-खुद 'वैराग्य' की ओर मुड़ गया। जिसके पास दिमाग नहीं होता, वो सिर्फ 'दिल' की सुनता है।
माया से दूर ले जाता है केतु
आप इसे ऐसे समझ सकते हैं—राहु हमें "और चाहिए" की भूख देता है, जबकि केतु कहता है "कुछ नहीं चाहिए"। जब किसी इंसान की कुंडली में केतु का प्रभाव बढ़ता है, तो अचानक उसका मन पैसों, रिश्तों और दिखावे से उचाट होने लगता है। इंसान को अकेलापन पसंद आने लगता है।
दरअसल, केतु हमें सताता नहीं है, बल्कि वो उन झूठे बंधनों को काट देता है (Detachment) जो हमें दुख दे रहे होते हैं। उसका काम है आपको इस बाहरी दुनिया से डिस्कनेक्ट करके आपकी अंतरात्मा (Inner Self) से कनेक्ट करना।
भगवान के चरणों में स्थान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब केतु का धड़ अलग हुआ, तो वह भगवान विष्णु के चरणों की तरफ ही गिर पड़ा था। जिसे स्वयं ईश्वर के चरणों का आश्रय मिल जाए, उसका अंतिम लक्ष्य तो मोक्ष ही होगा। इसीलिए, जिन लोगों पर केतु मेहरबान होता है, वे दुनिया के सबसे बेहतरीन आध्यात्मिक गुरु, साधु या deep thinkers बनते हैं।
तो अगली बार अगर केतु आपकी जिंदगी में उथल-पुथल मचाए, तो घबराइएगा मत। समझ लीजिए कि वो सफाई अभियान पर निकला है ताकि आप फालतू की मोह-माया से छूटकर असल सच को पहचान सकें। यह एक ऐसा कड़वा दोस्त है, जो दर्द तो देता है, पर सही रास्ता भी वही दिखाता है।