कनाडा में भारतीयों पर डिपोर्टेशन की गाज 2025 में टूटे सारे रिकॉर्ड, आखिर क्यों जबरन घर भेजे जा रहे हैं हजारों छात्र और वर्कर

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News India Live, Digital Desk:  कनाडा जाने का सपना देख रहे भारतीयों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आई है। साल 2025 में कनाडा सरकार ने भारतीय नागरिकों को डिपोर्ट करने के मामले में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केवल 2025 के शुरुआती 10 महीनों में ही लगभग 2,800 से अधिक भारतीयों को कनाडा से बाहर निकाला जा चुका है, और 6,500 से ज्यादा लोग अभी भी रडार पर हैं।

क्यों हो रही है इतनी बड़ी कार्रवाई? 3 मुख्य कारण

शरणार्थी (Refugee) नियमों का उल्लंघन: कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के अनुसार, बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक 'शरण' (Asylum) मांगकर वहां रहने की कोशिश करते हैं। जब जांच में उनके दावे फर्जी पाए जाते हैं, तो सरकार उन्हें तुरंत देश छोड़ने का आदेश देती है।

वीजा धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज: हाल के वर्षों में फर्जी एडमिशन लेटर और गलत वर्क एक्सपीरियंस दिखाकर वीजा हासिल करने के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। कनाडा ने अब अपना वेरिफिकेशन सिस्टम इतना मजबूत कर दिया है कि मामूली गड़बड़ी मिलने पर भी सीधा 'डिपोर्टेशन ऑर्डर' जारी किया जा रहा है।

इमिग्रेशन पॉलिसी में बड़ा बदलाव: कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व में सरकार ने 'अस्थायी प्रवासियों' (Temporary Residents) की संख्या को कुल आबादी के 5% तक सीमित करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट में 31% तक की कटौती की गई है।

डिपोर्टेशन के 3 सख्त लेवल: जिन्हें समझना जरूरी है

कनाडा सरकार तीन तरह के आदेशों के तहत लोगों को बाहर निकालती है:

डिपार्चर ऑर्डर: व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर स्वेच्छा से देश छोड़ना होता है।

एक्सक्लूजन ऑर्डर: इसमें व्यक्ति पर 1 से 5 साल तक कनाडा लौटने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है।

डिपोर्टेशन ऑर्डर: यह सबसे कठोर है। इसमें व्यक्ति के कनाडा आने पर स्थायी प्रतिबंध लग जाता है। दोबारा आने के लिए विशेष लिखित अनुमति की जरूरत होती है।

भारतीय छात्र सबसे ज्यादा प्रभावित

आंकड़ों की मानें तो 2024-25 के दौरान निकाले गए लोगों में सबसे बड़ी संख्या उन छात्रों की है जिनका वर्क परमिट एक्सपायर हो चुका था या जिन्होंने पढ़ाई पूरी करने के बाद अवैध रूप से रुकने की कोशिश की।