ईरान ने परमाणु केंद्रों पर चढ़ा दी कंक्रीट की अभेद्य परत, अमेरिकी हमले के डर से 'पाताल' में छिपाई अपनी ताकत
News India Live, Digital Desk: अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी सबसे कीमती संपत्ति—परमाणु केंद्रों को बचाने के लिए एक 'मास्टर प्लान' पर काम शुरू कर दिया है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है कि ईरान अपने प्रमुख परमाणु ठिकानों को जमीन के नीचे गहरी सुरंगों में शिफ्ट करने के साथ-साथ उन पर कंक्रीट और मिट्टी की कई फीट मोटी परतें चढ़ा रहा है। ईरान की यह किलेबंदी सीधे तौर पर अमेरिकी 'बंकर बस्टर' बमों के खतरे को देखते हुए की जा रही है।
कंक्रीट का 'सार्कोफैगस' और 'पिकैक्स माउंटेन' का रहस्य
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के परचिन (Parchin) सैन्य परिसर और नातांज (Natanz) के पास स्थित नए ठिकानों पर भारी निर्माण कार्य देखा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने 'तालेघन-2' जैसी संवेदनशील फैसिलिटी के चारों ओर कंक्रीट का एक मजबूत ढांचा (Sarcophagus) बनाया है और उसे मिट्टी से ढंक दिया है ताकि यह हवाई हमलों के लिए 'अदृश्य' और 'अभेद्य' बन जाए। इसके अलावा, 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) के नीचे करीब 100 मीटर की गहराई पर नई सुरंगें खोदी जा रही हैं, जहाँ तक पहुंचना दुनिया के सबसे आधुनिक बमों के लिए भी नामुमकिन माना जा रहा है।
क्यों डरा हुआ है ईरान?
यह हलचल ऐसे समय में बढ़ी है जब अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपने B-2 स्टील्थ बॉम्बर्स और परमाणु पनडुब्बियों की तैनाती बढ़ा दी है। साल 2025 में हुए पिछले सैन्य टकराव (ऑपरेशन मिडनाइट हैमर) के कड़वे अनुभवों से सीखते हुए, ईरान अब अपने यूरेनियम स्टॉकपाइल और सेंट्रीफ्यूज को ऐसी जगहों पर सुरक्षित कर रहा है जहाँ किसी भी 'स्पेशल फोर्स रेड' या हवाई हमले का असर न हो।
इस्फहान और फोर्डो: सुरंगों के द्वार हुए सील
सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि इस्फहान (Isfahan) और फोर्डो (Fordow) स्थित परमाणु केंद्रों के प्रवेश द्वारों को कंक्रीट और मलबे से बैकफिल (Backfill) किया जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल बमों से सुरक्षा के लिए है, बल्कि किसी भी संभावित जमीनी घुसपैठ को रोकने के लिए 'लॉक' की तरह काम करेगा।
क्या फेल हो जाएगी अमेरिकी कूटनीति?
ईरान की इस घेराबंदी ने पश्चिमी देशों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि परमाणु केंद्र इतने गहरे और सुरक्षित हो गए कि उन पर हमला करना संभव न रहे, तो ईरान की 'न्यूक्लियर डील' के लिए बातचीत करने की मजबूरी खत्म हो जाएगी। इससे क्षेत्र में हथियारों की एक नई दौड़ शुरू हो सकती है।