बांग्लादेश में नई शुरुआत पीएम तारीक रहमान का अल्पसंख्यकों को बड़ा भरोसा बोले चाहे हिंदू हों या मुस्लिम, यह देश सबका है

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News India Live, Digital Desk: 17 साल के निर्वासन के बाद सत्ता के शिखर पर पहुंचे बांग्लादेश के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री तारीक रहमान ने पदभार संभालते ही देश के नाम अपना पहला बड़ा संदेश जारी किया है। बुधवार रात राष्ट्र के नाम अपने पहले टेलीविजन संबोधन में उन्होंने बांग्लादेश को सभी धर्मों के लोगों के लिए एक 'सुरक्षित भूमि' बनाने का संकल्प लिया। उनका यह बयान विशेष रूप से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए मरहम की तरह देखा जा रहा है, जो पिछले कुछ समय से हिंसा और असुरक्षा का सामना कर रहे थे।

'राजनीतिक विचारधारा अलग, पर अधिकार बराबर'

60 वर्षीय प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की सरकार समावेशी शासन में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा,"चाहे आपने बीएनपी को वोट दिया हो या नहीं, या बिल्कुल भी वोट न दिया हो—इस सरकार पर सबका समान अधिकार है। एक बांग्लादेशी के रूप में हम सभी को इस देश में समान अधिकार प्राप्त हैं।"

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सीधा संदेश

अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता पैदा की थी। इस पर प्रधानमंत्री रहमान ने कहा:

समान पहचान: "मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, ईसाई चाहे किसी भी दल, विचार या धर्म के हों, यह देश हम सबका है।"

सुरक्षा का वादा: सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता कानून-व्यवस्था में सुधार करना और हर नागरिक को सुरक्षित महसूस कराना है।

कड़ी कार्रवाई: उन्होंने स्पष्ट किया कि अब 'पार्टी प्रभाव' नहीं, बल्कि 'कानून का शासन' अंतिम शब्द होगा।

भ्रष्टाचार और अर्थव्यवस्था पर प्रहार

प्रधानमंत्री ने देश की 'जर्जर' अर्थव्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन भ्रष्टाचार पर शून्य सहिष्णुता (Zero Tolerance) की नीति अपनाएगा। उन्होंने अपनी कैबिनेट को निर्देश दिए हैं कि वे सरकारी खर्चों में कटौती करें और आम जनता को गैस, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी भेदभाव के सुनिश्चित कराएं।

भारत के साथ संबंधों पर नजर

तारीक रहमान की जीत के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें फोन कर बधाई दी थी। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा भारत के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। ऐसे में रहमान का यह "प्लुरलिस्टिक" (बहुलतावादी) रुख दोनों देशों के बीच भविष्य के राजनयिक संबंधों के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।