मिडिल ईस्ट में तीसरे विश्व युद्ध का खतरा? समंदर में उतरा अमेरिका का महाबली जंगी बेड़ा
News India Live, Digital Desk : इज़रायल और हमास के बीच छिड़ी जंग अब सिर्फ दो पक्षों की लड़ाई नहीं रह गई है। इसमें अब दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति, अमेरिका ने भी सीधे तौर पर एंट्री ले ली है। अमेरिका ने अपने सबसे आधुनिक और खतरनाक एयरक्राफ्ट कैरियर (विमानवाहक पोत) 'यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड' को मिडिल ईस्ट के समंदर में तैनात कर दिया है।
यह कोई मामूली जहाज़ नहीं है, बल्कि समुद्र में तैरता एक पूरा शहर है, एक ऐसा 'समुद्री किला' जिस पर 75 से ज़्यादा लड़ाकू विमान तैनात हैं। अमेरिका का यह कदम इज़रायल को खुला समर्थन तो है ही, साथ ही ईरान और हिजबुल्लाह जैसे उसके दुश्मनों के लिए एक सीधी और साफ चेतावनी भी है।
किसको डराना चाहता है अमेरिका?
अमेरिका के इस कदम का असली मकसद इज़रायल के दुश्मनों को इस लड़ाई से दूर रखना है। अमेरिका को डर है कि कहीं हमास का साथ देने के लिए लेबनान में बैठा आतंकी संगठन हिजबुल्लाह भी इज़रायल पर हमला न कर दे। हिजबुल्लाह, हमास से कहीं ज़्यादा ताकतवर है और उसे ईरान का पूरा समर्थन हासिल है।
अगर हिजबुल्लाह इस जंग में कूद पड़ता है, तो यह लड़ाई इज़रायल के लिए दो मोर्चों पर हो जाएगी और इसका अंजाम बहुत भयानक हो सकता है। यह एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसमें ईरान और दूसरे देश भी शामिल हो सकते हैं।
इसलिए, अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने साफ कहा, "दुनिया में कोई भी देश या संगठन, जो इज़रायल के खिलाफ इस माहौल का फायदा उठाने की सोच रहा है, उसे हमारा एक ही शब्द है - ऐसा मत करना (DON'T)।"
क्या है यह 'समुद्री किला'?
'यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड' सिर्फ एक जहाज़ नहीं है, बल्कि एक पूरा 'कैरियर स्ट्राइक ग्रुप' है। इसका मतलब है कि इसके साथ कई और लड़ाकू जहाज़, जैसे क्रूज़र और डिस्ट्रॉयर भी हैं। इस पूरे बेड़े पर F-35, F-15, F-16 और A-10 जैसे दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमानों की पूरी फौज तैनात है।
यह बेड़ा पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किया गया है, जहां से यह पूरे मिडिल ईस्ट पर नज़र रख सकता है और ज़रूरत पड़ने पर कहीं भी हमला कर सकता है।
साफ है कि अमेरिका ने अपनी चाल चल दी है। उसका मकसद इस आग को और फैलने से रोकना है। अब पूरी दुनिया की नज़रें ईरान और हिजबुल्लाह पर टिकी हैं कि वे अमेरिका की इस खुली चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यह एक ऐसा मोड़ है, जहां एक छोटी सी गलती भी पूरे मिडिल ईस्ट को आग के हवाले कर सकती है।