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April 14 2026 05:47 am

रत्नागिरी के व्हाइट गोल्ड पर संकट के बादल,काजू की फसल 70% तक बर्बाद, बर्बादी की कगार पर किसान

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News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध बागवानी के लिए जाना जाता है, वहां से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। कोंकण का 'व्हाइट गोल्ड' यानी काजू इस समय अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जिलों में काजू की फसल में इस साल भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हजारों किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।

कुदरत का कहर: बेमौसम बारिश और गर्मी ने छीनी चमक

बताया जा रहा है कि इस साल मौसम के बदलते मिजाज ने काजू के बागानों को बुरी तरह प्रभावित किया है। शुरुआत में जब काजू के पेड़ों पर मोहर (फूल) आए थे, तब किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। लेकिन अचानक हुई बेमौसम बारिश, घना कोहरा और फिर उसके बाद बढ़ी भीषण गर्मी ने खेल बिगाड़ दिया। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान में इस तरह के उतार-चढ़ाव के कारण काजू का मोहर पूरी तरह से करप (झुलस) गया है।

रत्नागिरी के स्थानीय किसानों का कहना है कि इस साल उत्पादन में लगभग 65 से 70 प्रतिशत तक की कमी आने की आशंका है। जो काजू तैयार भी हो रहे हैं, उन पर कीटों का हमला होने के कारण उनकी गुणवत्ता खराब हो गई है।

बाजार में दाम ऊंचे, पर किसानों की जेब खाली

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ जहां बाजार में काजू के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रहे हैं, वहीं आम किसानों को इसका कोई फायदा नहीं मिल रहा है। उत्पादन इतना कम है कि किसानों के लिए अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। खाद, कीटनाशक और मजदूरी का खर्च बढ़ने से बागायतदार कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं। कई किसानों ने तो अब काजू की खेती से मोहभंग होने की बात भी कही है।

सरकार से मुआवजे की आस: सीएम ने दिया आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कोंकण के किसानों को बड़ी राहत देने का भरोसा दिया है। सरकार ने आश्वासन दिया है कि नुकसान का पंचनामा (सर्वेक्षण) जल्द पूरा कर लिया जाएगा और प्रभावित किसानों के लिए राहत पैकेज की घोषणा की जाएगी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी सरकार से मांग की है कि बीमा कंपनियों को जल्द से जल्द क्लेम देने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि किसानों को तुरंत वित्तीय सहायता मिल सके।