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April 14 2026 03:49 am

PoK और अफगानिस्तान बॉर्डर के पास चीन की नई साजिश, शिनजियांग में बना दिया नया जिला ,भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

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News India Live, Digital Desk: ड्रैगन ने एक बार फिर सीमाई इलाकों में अपनी विस्तारवादी नीतियों को हवा देते हुए नई साजिश रची है। चीन ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण शिनजियांग प्रांत में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान सीमा के करीब एक नए 'काउंटी' (जिले) का गठन कर दिया है। चीन के इस कदम ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर डाल दिया है। भारत ने इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य और प्रशासनिक उपस्थिति पर पहले भी कई बार अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है।

रणनीतिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है यह इलाका?

चीन द्वारा शिनजियांग में स्थापित किया गया यह नया जिला सीधे तौर पर उन सीमाओं के करीब है जो भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से बहुत संवेदनशील हैं। यह क्षेत्र न केवल PoK के करीब है, बल्कि अफगानिस्तान के वाखान कॉरिडोर के पास भी स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रशासनिक फेरबदल की आड़ में चीन सीमा पर अपनी सेना (PLA) की तैनाती को और अधिक मजबूत करना चाहता है। नए जिले के गठन से चीन को यहां इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने, सड़कें बनाने और सैन्य लॉजिस्टिक को तेजी से पहुंचाने में काफी आसानी होगी।

भारत की चिंता और कूटनीतिक स्टैंड

भारत ने हमेशा से PoK में चीन की किसी भी गतिविधि का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि वह भारत का अभिन्न अंग है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पहले से ही भारत की संप्रभुता के लिए चुनौती बना हुआ है और अब इस नए जिले का गठन आग में घी डालने जैसा काम कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि विवादित क्षेत्रों के पास यथास्थिति बदलने वाली किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस कदम को भारत की घेराबंदी करने की एक और कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी नजर

सूत्रों के अनुसार, चीन ने इस नए जिले में तेजी से विकास कार्य शुरू कर दिए हैं। यहाँ नए घर, संचार टावर और सर्विलांस सिस्टम लगाए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि चीन इन नागरिक बस्तियों का इस्तेमाल जासूसी और सीमा पर नजर रखने के लिए कर सकता है। भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार चल रही इस हलचल की बारीकी से निगरानी कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाए जाने की संभावना है, क्योंकि यह न केवल भारत बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए खतरा है।