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April 19 2026 01:29 am

हंगरी में महाउलटफेर16 साल बाद सत्ता से बाहर हुए ट्रंप के करीबी विक्टर ओर्बन, विपक्ष की ऐतिहासिक जीत

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News India Live, Digital Desk: यूरोपीय राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। हंगरी में पिछले 16 वर्षों से एकछत्र राज कर रहे प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन को आम चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले ओर्बन की इस हार ने न केवल हंगरी, बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया है। विपक्ष के एकजुट गठबंधन ने ओर्बन के 'अजेय' माने जाने वाले किले को ढहाते हुए देश में सत्ता परिवर्तन की नींव रख दी है।

16 साल के शासन का हुआ अंत

विक्टर ओर्बन साल 2010 से लगातार हंगरी की सत्ता पर काबिज थे। उन्हें यूरोप के सबसे कद्दावर और विवादास्पद दक्षिणपंथी नेताओं में गिना जाता है। ओर्बन पर अक्सर लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करने और मीडिया पर नियंत्रण रखने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इस बार महंगाई, भ्रष्टाचार और यूरोपीय संघ (EU) के साथ बढ़ते तनाव ने उनकी राह मुश्किल कर दी। विपक्षी दलों ने वैचारिक मतभेदों को किनारे रखकर एक साझा मोर्चा बनाया, जो ओर्बन के लंबे शासन को उखाड़ फेंकने में कामयाब रहा।

डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ा झटका

ओर्बन की हार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक व्यक्तिगत झटके के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप और ओर्बन के बीच बेहद करीबी रिश्ते रहे हैं और दोनों नेता अक्सर एक-दूसरे की नीतियों की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करते रहे हैं। ओर्बन की विदाई से यूरोप में ट्रंप के प्रभाव वाले गुट को भारी नुकसान पहुँचा है। जानकारों का मानना है कि हंगरी में हुए इस बदलाव का असर अब यूरोपीय संघ और अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों पर भी साफ दिखाई देगा।

लोकतंत्र की जीत या नई अस्थिरता?

विपक्षी गठबंधन की इस जीत को समर्थकों ने 'लोकतंत्र की बहाली' करार दिया है। राजधानी बुडापेस्ट सहित देश के विभिन्न हिस्सों में जश्न का माहौल है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अब नई सरकार के सामने बिखरी हुई अर्थव्यवस्था को संभालना और विभिन्न विचारधारा वाले दलों को एक साथ लेकर चलना सबसे बड़ी चुनौती होगी। ओर्बन की हार ने साबित कर दिया है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद जनता अब बदलाव और नए विजन की तलाश में है।