ब्लैक रॉक के CEO का बड़ा दावा भारत अब एक ग्लोबल पावर है, जानिए इस एक बयान से कैसे बदल जाएगी देश की किस्मत
News India Live, Digital Desk: हम अक्सर खबरों में सुनते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, लेकिन जब दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनी ब्लैक रॉक (BlackRock) के मुखिया ऐसी बात कहें, तो समझ जाइये कि मामला कुछ बड़ा है। ब्लैक रॉक के चेयरमैन और CEO लैरी फिंक ने हाल ही में भारत के बारे में जो कहा है, उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है।
'विकासशील' का टैग हटा, अब 'स्थापित ताकत' की बारी
लंबे समय से भारत को 'विकासशील' या 'इमर्जिंग मार्केट' कहा जाता रहा है यानी एक ऐसा देश जो आगे बढ़ रहा है। लेकिन अब लैरी फिंक का मानना है कि भारत उस पायदान को पार कर चुका है। उनके मुताबिक, भारत अब कोई 'भविष्य की संभावना' नहीं रहा, बल्कि वह आज की हकीकत यानी एक 'एस्टेब्लिश पावर' बन चुका है।
सीधी सी बात ये है कि दुनिया अब भारत को इस नजर से नहीं देखती कि "ये कब बड़ा होगा?", बल्कि इस नजर से देखती है कि "इसके साथ मिलकर आगे कैसे बढ़ा जाए?"
क्यों बढ़ रहा है भारत पर इतना भरोसा?
आखिर दुनिया के इतने बड़े-बड़े दिग्गज भारत पर दांव क्यों लगा रहे हैं? इसकी कुछ साफ़ वजहें हैं:
- डिजिटल क्रांति: गाँव-गाँव तक पहुँच चुका इंटरनेट और यूपीआई (UPI) जैसा मजबूत बैंकिंग सिस्टम।
- युवा शक्ति: भारत की एक बड़ी आबादी कामकाजी उम्र में है, जो ग्लोबल इकोनॉमी का इंजन बन रही है।
- राजनीतिक स्थिरता: निवेशकों को सबसे ज्यादा पसंद आती है ऐसी सरकार, जहाँ नीतियाँ बार-बार न बदलें, और भारत इस मोर्चे पर खुद को साबित कर रहा है।
क्या होता है ब्लैक रॉक के कहने का असर?
अगर आप नहीं जानते, तो बता दें कि ब्लैक रॉक दुनिया के अरबों-खरबों डॉलर मैनेज करती है। जब उनके जैसी कंपनी का टॉप लीडर किसी देश के बारे में ऐसा कहता है, तो पूरी दुनिया के इन्वेस्टर्स की नजर उस देश पर टिक जाती है। इसका सीधा असर भारत में आने वाले विदेशी निवेश (FDI) और शेयर बाजार पर पड़ता है।
अब आगे क्या?
फिंक का यह बयान एक बड़ी मुहर है कि भारत अब ग्लोबल स्टेज पर पीछे बैठने वालों में से नहीं है। यह उन लोगों के लिए भी एक संदेश है जो भारत की क्षमताओं पर शक करते थे। बेशक, अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं, लेकिन एक 'ग्लोबल पावर' के रूप में हमारी पहचान अब पक्की हो चुकी है।
यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि अब दुनिया हमें 'कोशिश करने वाला देश' नहीं, बल्कि 'कामयाब हो चुका देश' मान रही है।