नफरत के बीच जगी शांति की उम्मीद जब बरसों बाद साथ दिखे रूस-यूक्रेन के नेता, क्या ये जंग खत्म होने का संकेत है?
News India Live, Digital Desk: पिछले कुछ सालों से हम सब सुबह उठते ही खबरों में यूक्रेन की तबाही और रूस के कड़े रुख की खबरें पढ़ रहे हैं। बारूद के धुएं और लोगों की सिसकियों के बीच अक्सर ये सवाल मन में आता था क्या ये जंग कभी खत्म होगी? क्या ये दोनों देश कभी फिर से एक मेज पर बैठ पाएंगे?
अब शायद इसका जवाब मिलने वाला है। पूरे 4 साल के लंबे इंतजार के बाद कुछ ऐसा हुआ है जिसे दुनिया 'चमत्कार' से कम नहीं मान रही। एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधि एक साथ खड़े नजर आए।
ये मुलाकात इतनी खास क्यों है?
देखा जाए तो 2022 के युद्ध के बाद से रूस और यूक्रेन के बीच हर तरह की बातचीत और मेल-जोल लगभग बंद था। जहां रूस खड़ा होता था, वहां से यूक्रेन के प्रतिनिधि अक्सर 'वॉकआउट' (निकल जाना) कर जाते थे। लेकिन अब पहली बार ऐसा हुआ है कि दोनों ही देश एक ही प्लेटफार्म पर मौजूद रहे और अपनी-अपनी बात रखी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं है। सालों के तनाव के बाद एक ही कमरे में साथ बैठना यह बताता है कि पर्दे के पीछे कहीं न कहीं अब शांति को लेकर बात शुरू करने की कोशिश की जा रही है।
क्या युद्ध अब आखिरी दौर में है?
अभी कहना मुश्किल है, लेकिन उम्मीद पर ही दुनिया टिकी है। इस मुलाकात ने कम से कम ये दरवाजा तो खोल दिया है कि कूटनीति (Diplomacy) अभी मरी नहीं है। जब भी दुश्मन एक साथ आते हैं, तो ये संकेत मिलता है कि शायद दोनों पक्ष अब अपनी-अपनी जिद को किनारे रख रहे हैं और युद्ध के आर्थिक और मानवीय नुकसान से थक चुके हैं।
पूरी दुनिया को इस समय महंगाई और संसाधनों की कमी से जूझना पड़ रहा है क्योंकि इन दो देशों की लड़ाई ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है। ऐसे में इन दोनों का साथ आना न केवल उनके अपने नागरिकों के लिए, बल्कि भारत सहित हर देश के लिए सुकून की खबर है।
इंतजार है एक स्थायी समझौते का
फिलहाल तो ये सिर्फ एक छोटी सी शुरुआत है, जैसे घोर अंधेरे में एक मोमबत्ती का जलना। लेकिन अगर इसी मंच से शांति के बीज पड़े, तो करोड़ों मासूमों की जान बच जाएगी और दुनिया फिर से मुस्कुराहट की पटरी पर लौट सकेगी। दुआ यही है कि यह 'साथ' सिर्फ कागजों या फोटो तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर गोलियों की आवाज बंद होने का जरिया बने।