Jharkhand : नक्सलियों के घर में घुसकर बनाया कैंप, फिर ऐसे बिछाया जाल सारंडा मुठभेड़ की पूरी कहानी

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News India Live, Digital Desk : पहली नज़र में यह खबर किसी भी दूसरी मुठभेड़ की तरह लग सकती है - कि सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच गोलीबारी हुई और दो नक्सली मारे गए। लेकिन सारंडा के जंगलों में जो हुआ, वो कोई अचानक हुई घटना नहीं थी। यह एक सोची-समझी रणनीति का नतीजा था, एक ऐसा चक्रव्यूह जिसे पिछले तीन महीनों से बड़ी खामोशी और सब्र के साथ तैयार किया जा रहा था।

कहानी शुरू होती है तीन महीने पहले

आज से ठीक तीन महीने पहले, झारखंड पुलिस और CRPF के बड़े अधिकारियों ने एक साथ बैठकर एक नक्शा तैयार किया था। मकसद साफ था - नक्सलियों के सबसे बड़े और सुरक्षित किले, सारंडा को भेदना। इस बेहद गोपनीय मिशन को नाम दिया गया 'ऑपरेशन विजय प्रहार'। निशाना था 1 करोड़ का इनामी कमांडर मिसिर बेसरा और उसका पूरा दस्ता, जो इन्हीं जंगलों को अपना घर बनाकर सालों से आतंक का खेल चला रहा था।

सबसे बड़ा और हिम्मत वाला कदम

अधिकारियों को पता था कि बाहर से हमला करने से कुछ हासिल नहीं होगा। अगर दुश्मन को हराना है, तो उसके घर में घुसना पड़ेगा। यहीं पर इस ऑपरेशन का सबसे साहसी फैसला लिया गया। तय हुआ कि नक्सलियों के गढ़, सोनापी गाँव के ठीक पास, जंगल के बीचों-बीच सुरक्षाबलों का एक फॉरवर्ड कैंप बनाया जाएगा। यह वैसा ही था जैसे किसी शेर की मांद के ठीक मुहाने पर जाकर अपना तंबू गाड़ देना।

यह कदम एक गेम-चेंजर साबित हुआ। जैसे ही जवानों ने जंगल के अंदर अपना ठिकाना बनाया, नक्सलियों की दुनिया हिल गई। उनके आने-जाने के रास्ते कट गए, गाँव वालों से उनका संपर्क टूटने लगा और बाहर से मिलने वाली मदद भी बंद हो गई। वे अपने ही घर में कैदी बनकर रह गए थे।

और फिर आया सही मौका...

जवान तीन महीने तक सब्र से सही मौके का इंतज़ार करते रहे। वे हर छोटी-बड़ी हरकत पर नज़र रखे हुए थे। और फिर 1 मई को वह मौका आ ही गया। जैसे ही दस्ते की मूवमेंट की पक्की खबर मिली, जवानों ने चारों तरफ से घेराबंदी कर हमला बोल दिया। नतीजा सबके सामने था।

यह मुठभेड़ सिर्फ दो नक्सलियों की मौत नहीं है, बल्कि यह उस बड़ी लड़ाई की एक छोटी सी जीत है, जिसकी तैयारी महीनों से चल रही थी। यह बताता है कि अब लड़ाई बराबरी की नहीं, बल्कि नक्सलियों के खात्मे की हो रही है, वो भी उनकी शर्तों पर नहीं, बल्कि सुरक्षाबलों की शर्तों पर।