ईरान ने परमाणु बम पर लिया बड़ा यू-टर्न? आखिर क्यों 'परमाणु हथियार' को बताया अपनी ही नीति के खिलाफ
News India Live, Digital Desk: दुनियाभर में जब भी किसी ताकतवर देश की चर्चा होती है, तो अक्सर बात उनकी मिलिट्री पावर और परमाणु बम (Nuclear Weapon) पर जाकर टिक जाती है। सालों से ईरान का नाम भी इसी बहस का हिस्सा रहा है। पश्चिमी देशों ने हमेशा यह शक जताया कि ईरान गुपचुप तरीके से अपना परमाणु बम तैयार कर रहा है। लेकिन हाल ही में ईरान की ओर से एक ऐसा बयान आया है, जिसने इस पूरी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।
ईरान के सुप्रीम लीडर के एक खास प्रतिनिधि ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका देश कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता था और न ही आगे इसकी कोई योजना है। इसकी वजह कोई डर नहीं, बल्कि उनका धर्म है।
'हराम' है परमाणु हथियार: क्या है इसके पीछे का तर्क?
ईरान की तरफ से कहा गया है कि उनके मजहब में इंसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचाने वाले हथियारों की कोई जगह नहीं है। इसे 'हराम' (यानी धर्म के विरुद्ध) माना गया है। यह बात पहली बार नहीं कही गई है, इससे पहले खुद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने भी एक 'फतवा' जारी कर कहा था कि इस्लाम परमाणु हथियारों को रखने या उनका इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देता।
प्रतिनिधि का कहना है कि अगर ईरान चाहता, तो वह काफी पहले परमाणु संपन्न देश बन सकता था क्योंकि उनके पास वह तकनीक और समझ है, लेकिन उन्होंने जानबूझकर अपने कदम पीछे रखे।
सिर्फ धार्मिक कारण या कूटनीति का खेल?
इस बयान को दुनिया भर के जानकार अलग-अलग चश्मे से देख रहे हैं। एक तरफ जहां ईरान इसे अपनी 'नैतिक जीत' और धार्मिक पाबंदी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ कूटनीतिज्ञ इसे एक 'ढाल' की तरह देख रहे हैं। दरअसल, ईरान पर सालों से लगे आर्थिक प्रतिबंधों की बड़ी वजह यही परमाणु शक रहा है। ऐसे में 'धार्मिक रुख' का इस्तेमाल कर ईरान शायद दुनिया को यह भरोसा दिलाना चाहता है कि उस पर लगाए गए आरोप और पाबंदियाँ बेबुनियाद हैं।
एक बड़ी चुनौती और शांति का रास्ता
ईरान का यह दावा उस समय आया है जब मिडिल-ईस्ट में तनाव चरम पर है। इज़राइल और अमेरिका जैसे देश अब भी ईरान के इरादों पर शक करते हैं। लेकिन ईरान के इस नए बयान ने कम से कम चर्चा की एक मेज तो बिछा ही दी है। क्या दुनिया ईरान की इस 'धार्मिक दलील' पर भरोसा करेगी? या फिर शक की ये तलवार ऐसे ही लटकी रहेगी?
सच जो भी हो, पर एक बात तो साफ है परमाणु हथियारों के मुद्दे पर अब बात सिर्फ लैब और यूरेनियम तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें अब धर्म और नैतिकता का अध्याय भी जुड़ गया है।