Bihar Election : प्रशांत किशोर को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली फौरी राहत कहा- पटना हाई कोर्ट जाइए
News India Live, Digital Desk: बिहार विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियों के बीच, प्रशांत किशोर (पीके) और उनकी पार्टी 'जन सुराज' को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव प्रक्रियाओं और अन्य मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए प्रशांत किशोर को पटना हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया है।
क्या थी प्रशांत किशोर की याचिका?
प्रशांत किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी, जिसमें आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया गया था। उनकी मुख्य चिंताएं निम्नलिखित थीं:
मतदाता सूची में सुधार: मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और फर्जी नामों को हटाने की मांग।
चुनाव की निष्पक्षता: राज्य में चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए विशेष दिशा-निर्देश।
समान अवसर (Level Playing Field): नई पार्टियों को स्थापित दलों के मुकाबले चुनाव प्रचार और संसाधनों में समान अवसर प्रदान करना।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और आदेश
जस्टिस की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि चूंकि मामला एक विशिष्ट राज्य (बिहार) के चुनावों से संबंधित है, इसलिए बेहतर होगा कि पहले उच्च न्यायालय (High Court) इसका संज्ञान ले।
अदालत का रुख: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहते। याचिकाकर्ता के पास संबंधित हाई कोर्ट जाने का विकल्प मौजूद है। आप पहले अपनी शिकायतों को पटना हाई कोर्ट के समक्ष रखें।"
याचिका वापस ली: सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख को देखते हुए, प्रशांत किशोर के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
राजनीतिक मायने (Political Impact)
बिहार में 2026 के अंत में चुनाव होने हैं और प्रशांत किशोर अपनी 'पदयात्रा' के जरिए राज्य में एक तीसरा विकल्प तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
कानूनी लड़ाई अब पटना में: अब पीके की टीम को पटना हाई कोर्ट में नई याचिका दायर करनी होगी, जिससे कानूनी प्रक्रिया में थोड़ा और समय लग सकता है।
रणनीतिक कदम: विशेषज्ञों का मानना है कि यह याचिका केवल चुनावी सुधार के लिए नहीं, बल्कि जनता के बीच यह संदेश देने के लिए भी थी कि 'जन सुराज' व्यवस्था परिवर्तन के लिए गंभीर है।
आगे की राह
प्रशांत किशोर के करीबियों का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट की सलाह का सम्मान करते हुए जल्द ही पटना हाई कोर्ट में अपनी बात रखेंगे। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के आगामी चुनाव पूरी तरह दोषमुक्त और निष्पक्ष हों।