Bangladesh Election 2026 : क्या बदल जाएगा भारत का 'पड़ोसी धर्म'? BNP और जमात के मेनिफेस्टो में हिंदुओं और दिल्ली के लिए क्या है खास?

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News India Live, Digital Desk : बांग्लादेश की सत्ता में वापसी की कोशिशों में जुटे तारिक रहमान (Tarique Rahman) और जमात-ए-इस्लामी ने अपना चुनावी पिटारा खोल दिया है। 2024 की क्रांति के बाद बदले हुए परिवेश में हो रहे इन चुनावों में विपक्षी दलों का घोषणापत्र न केवल बांग्लादेश की घरेलू नीति, बल्कि भारत के साथ रणनीतिक संबंधों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत के प्रति BNP का 'बदला हुआ' रुख?

BNP ने अपने मेनिफेस्टो में 'बांग्लादेश फर्स्ट' (Bangladesh First) की नीति का एलान किया है। पार्टी का कहना है कि वे किसी भी देश को अपना 'मास्टर' स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन सभी पड़ोसियों के साथ बराबरी और सम्मान के आधार पर संबंध रखेंगे।

मेनिफेस्टो की 3 बड़ी कूटनीतिक बातें:

बॉर्डर किलिंग पर रोक: BNP ने वादा किया है कि सीमा पर होने वाली मौतों को रोकने के लिए भारत के साथ 'सख्त' बातचीत की जाएगी।

नदियों का पानी: तीस्ता और पद्मा जैसी साझा नदियों के पानी के 'उचित बंटवारे' के मुद्दे को प्राथमिकता पर रखा गया है।

संप्रभुता और सुरक्षा: पार्टी ने संकल्प लिया है कि बांग्लादेश की जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा (जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक बड़ी राहत हो सकती है)।

हिंदू अल्पसंख्यकों पर क्या बोले विपक्षी दल?

अक्सर 'हिंदू विरोधी' छवि के आरोपों से घिरे रहने वाले जमात-ए-इस्लामी और BNP ने इस बार सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।

जमात का दावा: जमात-ए-इस्लामी ने अपने मेनिफेस्टो में कहा है कि यदि वे सत्ता में आते हैं, तो किसी भी हिंदू को देश छोड़कर भारत नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने 'न्याय और समानता' का वादा किया है।

धार्मिक स्वतंत्रता: BNP ने अपने मेनिफेस्टो में "धर्म व्यक्ति का, राज्य सबका" का नारा बुलंद किया है, जिसमें हर नागरिक को अपनी आस्था का पालन करने की पूर्ण सुरक्षा का वादा है।

भेदभाव का अंत: घोषणापत्र में वादा किया गया है कि अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाली हिंसा और नौकरियों में भेदभाव को पूरी तरह खत्म किया जाएगा।

क्या दिल्ली के लिए चुनौतियां बढ़ेंगी?

भले ही मेनिफेस्टो में 'सकारात्मक संबंधों' की बात हो, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञ सचेत हैं। शेख हसीना की सरकार के दौरान भारत जिस 'कंफर्ट जोन' में था, वह अब बदल सकता है।

हसीना का प्रत्यर्पण: BNP ने स्पष्ट किया है कि वे भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग जारी रखेंगे।

चीन का प्रभाव: मेनिफेस्टो में क्षेत्रीय शक्तियों के साथ संतुलन की बात कही गई है, जिसका अर्थ है कि बांग्लादेश का झुकाव चीन की ओर भी बढ़ सकता है।