ट्रंप की सुप्रीम कोर्ट को दो-टूक ,अगर मेरा फैसला पलटा, तो बर्बाद हो जाएगा अमेरिका
News India Live, Digital Desk: डोनाल्ड ट्रंप को अपनी बात बिना लाग-लपेट के कहने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे अमेरिका की सबसे बड़ी अदालत यानी 'सुप्रीम कोर्ट' को ही लपेटे में ले लिया है। मामला जुड़ा है उन 'टैरिफ' (Tax) से, जो ट्रंप विदेशी सामानों पर लगाने की जिद ठाने बैठे हैं। ट्रंप ने साफ कह दिया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस फैसले के खिलाफ कोई आदेश दिया, तो "अमेरिका पूरी तरह से मुसीबत (Screwed) में पड़ जाएगा।"
क्या है ये सारा बवाल?
इसे जरा आसान भाषा में समझते हैं। ट्रंप चाहते हैं कि मेक्सिको, कनाडा और चीन जैसे देशों से आने वाले सामान पर भारी टैक्स (Tariffs) लगाया जाए। उनका तर्क है कि जब विदेशी सामान महंगा होगा, तभी अमेरिका की अपनी कंपनियाँ आगे बढ़ेंगी और देश का पैसा देश में रहेगा। लेकिन यहाँ कानूनी पेंच ये है कि क्या एक राष्ट्रपति अपनी मर्जी से इतना भारी टैक्स थोप सकता है?
सुप्रीम कोर्ट को क्यों दी चेतावनी?
दरअसल, कई विशेषज्ञों और कंपनियों का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला नियमों के खिलाफ है और इससे अमेरिका में महंगाई चरम पर पहुँच जाएगी। इसी बात को लेकर यह मामला अदालत की चौखट तक पहुँच सकता है। इसी पर अपनी नाराजगी जताते हुए ट्रंप ने कहा कि अगर अदालत बीच में आई, तो देश की अर्थव्यवस्था का बचना मुश्किल है। उनके कहने का मतलब सीधा है—देश की भलाई के लिए उन्हें 'फ्री हैंड' चाहिए, और कोई भी रोक-टोक अमेरिका को बर्बाद कर सकती है।
किस पर गिरेगी गाज?
ट्रंप की नजर इस समय खास तौर पर तीन देशों पर है—कनाडा, मेक्सिको और चीन। उन्होंने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि वो इन देशों से आने वाली चीजों पर 25% तक टैक्स बढ़ा सकते हैं। ट्रंप का मानना है कि ये देश अमेरिका का फायदा उठा रहे हैं और ड्रग्स से लेकर घुसपैठ तक की समस्याओं के पीछे यही हैं। उनके लिए 'टैरिफ' सिर्फ एक टैक्स नहीं, बल्कि बातचीत की टेबल पर दूसरे देशों को झुकाने का एक हथियार भी है।
क्या ये डराने की कोशिश है?
एक आम आदमी के नजरिए से देखें, तो ट्रंप का यह बयान सीधे-सीधे ज्यूडिशरी (न्यायपालिका) पर दबाव बनाने जैसा भी लग सकता है। अमेरिका में शक्तियों के बँटवारे को लेकर बहस छिड़ गई है कि आखिर देश को कौन चलाएगा—जनता द्वारा चुना गया राष्ट्रपति या संविधान की रक्षा करने वाली अदालत?
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं कि क्या वो ट्रंप के इन कड़े आर्थिक फैसलों में हस्तक्षेप करेगी, या फिर ट्रंप की इस 'टैरिफ वॉर' को हरी झंडी मिल जाएगी। खैर, इतना तो तय है कि अगर ये टैक्स लागू होते हैं, तो दुनिया भर के बाजार में इसकी गूँज जरूर सुनाई देगी।