सिर्फ अंडा-चिकन ही काफी नहीं? क्या प्लांट प्रोटीन वाकई आपकी सेहत और ताकत का असली सीक्रेट है
News India Live, Digital Desk: हम सबने ये सुना है कि "अगर बॉडी बनानी है तो दबाकर अंडे खाओ।" सालों से हमें यही बताया गया है कि मांस और अंडे प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत हैं क्योंकि ये 'कम्पलीट प्रोटीन' (Complete Protein) होते हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि ये आपकी मांसपेशियों की मरम्मत (Muscle repair) के लिए बेहतरीन हैं। लेकिन सिक्का का दूसरा पहलू कुछ और ही कहता है।
प्लांट-बेस्ड प्रोटीन अचानक क्यों 'सुपरस्टार' बन गया?
सबसे पहले तो यह गलतफहमी निकाल दीजिये कि शाकाहारी खाने में ताकत नहीं होती। दाल, छोले, राजमा, सोयाबीन, मूंगफली और पनीर जैसी चीजों में भरपूर प्रोटीन तो है ही, साथ ही इनमें वो चीज भी है जो मांस में नहीं मिलती और वो है फाइबर (Fiber)।
एनिमल प्रोटीन (मांस/अंडा) खाते वक्त हम अक्सर उसमें छिपी 'कोलेस्ट्रॉल' और 'सैचुरेटेड फैट' को नजरअंदाज कर देते हैं, जो लंबे समय में दिल की बीमारियों की वजह बन सकता है। इसके उलट, प्लांट-बेस्ड प्रोटीन न केवल आपकी सेहत सुधारते हैं बल्कि आपके डाइजेशन (पाचन) को भी हल्का और चकाचक रखते हैं।
तुलना करें तो कौन जीत रहा है?
- एब्जॉर्प्शन (Absorption): यहाँ अंडे बाजी मार लेते हैं। एनिमल प्रोटीन को शरीर थोड़ी ज्यादा आसानी से पचा लेता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि प्लांट प्रोटीन कमतर है। अगर आप अलग-अलग तरह के शाकाहारी फूड्स मिलाकर खाते हैं (जैसे दाल और चावल), तो आपको भी वही सारे जरूरी एमिनो एसिड्स मिल जाते हैं।
- बीमारियों से बचाव: यहाँ प्लांट-बेस्ड प्रोटीन साफ़ तौर पर विनर है। रिसर्च कहती है कि जो लोग ज्यादा सब्जियां और दालें खाते हैं, उन्हें डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और मोटापे का खतरा काफी कम होता है।
- एनर्जी लेवल: मीट और अंडा खाने के बाद कई बार आपको भारीपन या नींद आने लगती है। वहीं, प्लांट प्रोटीन आपको हल्का महसूस कराता है और दिनभर एनर्जेटिक रखता है।
आखिर फैसला क्या लें?
देखिए, बात सिर्फ 'वेजिटेरियन बनाम नॉन-वेजिटेरियन' की नहीं है। बात है बैलेंस की। अगर आप मीट लवर भी हैं, तो भी आपको अपनी डाइट में ज्यादा से ज्यादा पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को शामिल करना चाहिए। और अगर आप शाकाहारी हैं, तो डरे नहीं अपनी थाली में दालें, चिया सीड्स, और सोया की मात्रा बढ़ा दें, आपका प्रोटीन कोटा बड़े आराम से पूरा हो जाएगा।