ट्रंप की वापसी और ईरान की बेचैनी ,क्या सच में खत्म होने वाली है मिडिल-ईस्ट की ये पुरानी जंग?

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News India Live, Digital Desk: दुनिया की राजनीति में जब डोनाल्ड ट्रंप कुछ बोलते हैं, तो उसका शोर कोसों दूर तक सुनाई देता है। ट्रंप अपनी दूसरी पारी की शुरुआत भी कुछ इसी तेवर के साथ कर रहे हैं। इस बार उनके निशाने पर एक बार फिर उनका पुराना प्रतिद्वंद्वी 'ईरान' है। ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बहुत ही हैरान करने वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि ईरान अब "मार खाते-खाते थक गया है" (Tired of being beaten) और अब वह बातचीत के लिए हाथ-पैर मार रहा है।

ट्रंप के दावे में कितनी गहराई है?
इसे समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाकर देखना होगा। ट्रंप अपनी पहली सरकार के दौरान ही ईरान के साथ 'मैक्सिमम प्रेशर' (अधिकतम दबाव) की रणनीति अपना चुके हैं। ट्रंप का मानना है कि उनकी तरफ से लगाए गए सख्त आर्थिक प्रतिबंधों और हालिया क्षेत्रीय झटकों ने ईरान की कमर तोड़ दी है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि ईरान अब उस हालत में नहीं है कि वह अमेरिका के खिलाफ कोई बड़ा कदम उठाए, इसलिए अब वह बातचीत की मेज पर आने के लिए 'विनती' कर रहा है।

क्या है मिडिल-ईस्ट का नया गणित?
अक्सर देखा जाता है कि जब भी अमेरिका में नेतृत्व बदलता है, तो मिडिल-ईस्ट (मध्य-पूर्व) के समीकरण भी बदल जाते हैं। ट्रंप का कहना है कि जब वो सत्ता से बाहर थे, तब ईरान ने अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन अब जब वो वापस आ गए हैं, तो ईरान समझ गया है कि पुरानी जिद काम नहीं आएगी। हमास और हिजबुल्ला जैसे गुटों के खिलाफ जो कार्रवाई हो रही है, उसे भी ट्रंप ने अपनी रणनीति की एक जीत की तरह पेश किया है।

ईरान का रुख क्या हो सकता है?
सच कहें तो ईरान की तरफ से फिलहाल इस पर कोई 'अधिकारिक' कबूलनामा नहीं आया है कि वे गिड़गिड़ा रहे हैं। बल्कि ईरान हमेशा यह दिखाता रहा है कि वह झुकने वालों में से नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि वहाँ की आम जनता आर्थिक तंगी से परेशान है। ट्रंप जानते हैं कि ईरान के भीतर बढ़ता असंतोष उनका सबसे बड़ा हथियार है। ट्रंप ने बातों-बातों में यह इशारा भी कर दिया कि वे बातचीत के लिए तैयार तो हैं, लेकिन शर्तें सिर्फ और सिर्फ अमेरिका की होंगी।

एक आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
देखा जाए तो ट्रंप का यह दावा दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश है कि अब मिडिल-ईस्ट में अमेरिका की 'धाक' वापस लौट आई है। अगर ट्रंप के कहने के मुताबिक ईरान सच में बातचीत की मेज पर आता है, तो शायद कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों और वैश्विक शांति पर इसका सकारात्मक असर पड़े। लेकिन इतिहास गवाह है कि ट्रंप और ईरान के बीच की ये जंग इतनी जल्दी खत्म नहीं होती।

अभी के लिए, ये कहना गलत नहीं होगा कि ट्रंप ने बातचीत शुरू होने से पहले ही 'साइकोलॉजिकल वॉर' (मानसिक युद्ध) जीतना शुरू कर दिया है।