यूक्रेन के बाद अब ट्रंप ने सुलझाया थाईलैंड कंबोडिया का पुराना पंगा, हो गया सीजफायर का ऐलान
News India Live, Digital Desk : जब दुनिया को लगता है कि कोई मामला बुरी तरह उलझ चुका है, वहीं से डोनाल्ड ट्रंप की 'डील' करने की कला शुरू होती है। पिछले कुछ दिनों से हम लगातार देख रहे हैं कि कैसे ट्रंप एक के बाद एक ग्लोबल संकटों में सीधे एंट्री मार रहे हैं। ताजा मामला दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ा है, जहाँ थाईलैंड और कंबोडिया के बीच का पुराना तनाव एक बड़े समझौते में बदल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने खुद ऐलान किया है कि दोनों देशों के बीच युद्ध विराम (Ceasefire) हो चुका है।
सालों पुरानी कड़वाहट और अचानक सुलह?
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच का यह सीमा विवाद कोई कल-परसों का नहीं है। दोनों देशों के बीच मंदिरों और जमीन के टुकड़ों को लेकर दशकों से खटास रही है। कई बार वहां गोलियां चलीं और मासूमों की जानें गईं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि ये मुद्दा इतनी आसानी से हल की तरफ बढ़ेगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया और अपनी डिप्लोमेसी के जरिए साफ कर दिया कि दुनिया को इस वक्त और जंग की जरूरत नहीं है। उनके हस्तक्षेप के बाद दोनों ही देश पीछे हटने और आपसी सहयोग पर राजी हो गए। इसे ट्रंप की एक बड़ी राजनीतिक जीत माना जा रहा है।
आखिर ट्रंप के हाथ क्या लगा?
कहा जाता है कि ट्रंप हमेशा मुनाफे और स्थिरता की बात करते हैं। थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों के बीच अगर शांति रहती है, तो न केवल उस इलाके में अमेरिका का दबदबा बढ़ेगा, बल्कि व्यापारिक मार्ग भी सुरक्षित होंगे। इस शांति समझौते का सीधा मतलब है कि अब उस सीमा पर बंदूकों का शोर नहीं बल्कि व्यापार और पर्यटकों की आवाजाही सुनाई देगी।
हवा में नहीं, जमीन पर होगा असर
अभी तक कई अंतरराष्ट्रीय मंचों ने कोशिश की थी कि थाईलैंड और कंबोडिया मिल-बैठकर अपनी बातें सुलझा लें, लेकिन नतीजा सिफ़र रहता था। अब ट्रंप की इस घोषणा ने बता दिया है कि आने वाले समय में व्हाइट हाउस का रवैया बहुत आक्रामक और सुलझाने वाला (Fixer) होने वाला है। उन्होंने संकेत दिया है कि दुनिया के बाकी संघर्षों को भी वह एक-एक कर इसी तरह खत्म करेंगे।
क्या ये स्थायी शांति है?
एक सवाल लोगों के मन में जरूर है क्या ट्रंप का यह सीजफायर लंबे समय तक टिकेगा? डिप्लोमेसी के जानकारों का कहना है कि जब दो देश एक बड़ी ताकत के भरोसे पर हाथ मिलाते हैं, तो उसकी नींव मजबूत होती है। बहरहाल, जो भी हो, आज थाईलैंड और कंबोडिया की सरहदों पर रह रहे लाखों लोग चैन की नींद सो सकेंगे।