Jharkhand Crime : खूंटी का काला अध्याय वहम और अंधविश्वास ने ली एक मासूम की जान,आखिर जिम्मेदार कौन?
News India Live, Digital Desk: हम अक्सर कहते हैं कि दुनिया बदल रही है, तकनीक आसमान छू रही है, लेकिन जब झारखंड के खूंटी जैसे इलाकों से ऐसी खबरें आती हैं, तो सारे दावे खोखले लगने लगते हैं। यहां इंसानियत एक बार फिर हार गई है और जीत हुई है उस पुराने, सड़े-गले अंधविश्वास की, जिसे हम 'जादू-टोना' कहते हैं। खूंटी जिले में एक नाबालिग बच्चे की हत्या सिर्फ एक जुर्म नहीं, बल्कि हमारे समाज के माथे पर लगा वो कलंक है जो आसानी से नहीं मिटने वाला।
शक बना यमराज: क्या है पूरा मामला?
सोचिए उस बच्चे पर क्या गुजरी होगी जिसे शायद यह भी ठीक से नहीं पता होगा कि "काला जादू" या "बिसाही" होता क्या है। खबर के मुताबिक, खूंटी के एक गांव में कुछ लोगों ने सिर्फ शक की बिनाह पर एक हंसते-खेलते बच्चे की जान ले ली। उनका वहम था कि यह बच्चा जादू-टोना करता है। जरा सोचिए, एक नाबालिग बच्चा और जादू-टोना? यह बात ही गले से नीचे नहीं उतरती। लेकिन अंधविश्वास की पट्टी जब आंखों पर बंधती है, तो इंसान को मासूमियत नजर नहीं आती।
खूंटी में डर और सन्नाटा
घटना के बाद से पूरे इलाके में मातम और डर का माहौल है। जिस उम्र में बच्चे के हाथों में किताबें और खिलौने होने चाहिए थे, वहां उसकी जिंदगी बेरहमी से छीन ली गई। स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। कानून अपना काम करेगा, आरोपी पकड़े भी जाएंगे, लेकिन जो जान चली गई, उसे कौन लौटाएगा?
यह सिर्फ हत्या नहीं, समाज पर सवाल है
झारखंड के कई इलाकों में डायन-बिसाही या जादू-टोना के नाम पर हत्याएं आज भी रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। अक्सर बुजुर्गों या महिलाओं को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब तो बच्चों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। यह घटना हमें झकझोरने के लिए काफी है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं? क्या शिक्षा और जागरूकता की कमी अभी भी इतनी गहरी है कि हम अपने ही बच्चों के दुश्मन बन बैठे हैं?