मीटिंग से पहले रोहिणी आचार्या का वो ट्वीट, जिसने तेजस्वी के लिए खड़ी कर दी मुश्किल
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में कब क्या हो जाए, कहना मुश्किल है, लेकिन जब बात लालू प्रसाद यादव के परिवार की हो, तो हर छोटी बात बड़ी खबर बन जाती है। अभी हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की दिल्ली में एक बहुत अहम बैठक (राष्ट्रीय कार्यकारिणी) होने वाली थी। उम्मीद थी कि सारी चर्चा आगामी चुनाव और रणनीति पर होगी, लेकिन बैठक शुरू होने से ठीक पहले माहौल गर्मा गया। वजह बनीं लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्या।
एक ट्वीट जिसने बढ़ा दी धड़कनें
हुआ यूं कि दिल्ली में आरजेडी के बड़े नेता जुट रहे थे, कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी कुछ बड़े फैसले ले सकती है। सब कुछ ठीक चल रहा था। तभी अचानक सोशल मीडिया पर रोहिणी आचार्या के कुछ पोस्ट सामने आए। ये कोई साधारण पोस्ट नहीं थे। इन शब्दों में तल्खी थी, गुस्सा था और बिना नाम लिए किसी को बहुत कुछ समझाने की कोशिश थी।
रोहिणी ने अपनी बातों में कुछ लोगों की 'नीयत' और 'बदले हुए तेवर' पर निशाना साधा। जैसे ही ये पंक्तियाँ सियासी गलियारों में पहुंचीं, अटकलों का बाजार गर्म हो गया। लोग पूछने लगे—क्या पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं है? क्या कोई अपने ही घर में दगा कर रहा है?
निशाने पर कौन—अपने या पराये?
रोहिणी आचार्या को अक्सर अपने भाई तेजस्वी यादव और पिता लालू यादव के लिए ढाल बनकर खड़े होते देखा गया है। उन्होंने अपनी किडनी देकर पिता की जान बचाई, जिसके बाद से उनकी हर बात को बिहार की जनता और पार्टी गंभीरता से लेती है।
ऐसे में, इस महत्वपूर्ण बैठक से पहले उनका ये बागी तेवर देखकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह गुस्सा किसके लिए था? कुछ लोग इसे पार्टी के भीतर छिपे 'गद्दारों' के लिए चेतावनी मान रहे हैं, तो कुछ इसे पारिवारिक मनमुटाव से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, ट्वीट कुछ देर बाद हटा दिए गए (या चर्चा का विषय बनते ही गायब हो गए), लेकिन जो संदेश जाना था, वह चला गया।
तेजस्वी के सामने नई चुनौती
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा असहज स्थिति तेजस्वी यादव के लिए बन गई है। एक तरफ उन्हें पार्टी को एकजुट रखकर आगे बढ़ाना है, और दूसरी तरफ अपनी ही बहन के ऐसे तीखे बयानों से उपजे सवालों का जवाब देना है।
विपक्षी दलों को तो जैसे बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया। वे अब चटखारे लेकर कह रहे हैं कि 'जंगलराज के युवराज' के घर में ही अब महाभारत शुरू हो गई है। खैर, सच्चाई जो भी हो, रोहिणी के इस 'डिजिटल प्रहार' ने दिल्ली की ठंडी सुबह में बिहार का सियासी तापमान जरूर बढ़ा दिया है। अब देखना यह है कि क्या यह सिर्फ नाराजगी थी या किसी बड़े तूफ़ान की आहट?