आखिर कितनी अमीर है बीजेपी? चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट में करोड़ों की कमाई का पूरा कच्चा-चिट्ठा

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News India Live, Digital Desk: भारत में जब भी चुनाव का जिक्र आता है, तो जहन में बड़े-बड़े रैलियां, चमक-धमक और प्रचार के बड़े ताम-झाम की तस्वीर उभरती है। जाहिर है, इन सब कामों के लिए बहुत बड़े फंड की जरूरत होती है। अब सवाल ये उठता है कि आखिर राजनीतिक पार्टियों के पास इतना पैसा आता कहां से है और किस पार्टी की तिजोरी कितनी भरी हुई है? हाल ही में, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने चुनाव आयोग (ECI) को अपनी ताज़ा सालाना रिपोर्ट सौंपी है, जिसने इस मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

इलेक्शन कमीशन को क्या बताया गया?
नियम के मुताबिक, हर रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी को साल भर में मिले चंदे और खर्च का हिसाब चुनाव आयोग को देना पड़ता है। बीजेपी ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान उसे देश के कोने-कोने से और अलग-अलग स्रोतों से कितनी बड़ी रकम हासिल हुई है।

इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि बीजेपी फंड मिलने के मामले में अन्य तमाम राजनीतिक दलों से कोसों आगे नज़र आ रही है। आंकड़ों की बात करें, तो इस बार भी बीजेपी को मिलने वाला चंदा हजारों करोड़ों में है। पार्टी ने एक-एक पैसे का विवरण दिया है—कि किसने कितना चंदा दिया और यह पैसा किन माध्यमों (जैसे इलेक्टोरल बॉन्ड या व्यक्तिगत दान) के जरिए पार्टी के खाते में पहुँचा।

सिर्फ चंदा ही नहीं, खर्चे भी हैं भारी!
राजनीति सिर्फ पैसा इकट्ठा करने का खेल नहीं है, बल्कि उसे खर्च करने का भी है। बीजेपी की रिपोर्ट में सिर्फ कमाई ही नहीं, बल्कि चुनावी विज्ञापनों, रैलियों और हवाई दौरों पर होने वाले खर्चों का भी ज़िक्र है। जानकारों का कहना है कि पार्टी ने आने वाले बड़े चुनावों के लिए फंड का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित भी रखा है। दिलचस्प बात ये है कि जब तुलना कांग्रेस या अन्य क्षेत्रीय दलों से की जाती है, तो उनके मुकाबले बीजेपी का 'डोनेशन बैंक' काफी मज़बूत दिखाई देता है।

पारदर्शिता और आम जनता का सवाल
सोशल मीडिया पर लोग अक्सर पूछते हैं कि इतनी भारी-भरकम रकम पार्टियों को आखिर कौन और क्यों देता है? हालांकि, चुनाव आयोग को सौंपी गई इस रिपोर्ट में पारदर्शिता लाने की कोशिश की गई है, लेकिन अभी भी एक आम नागरिक के लिए 'पॉलिटिकल फंडिंग' की जटिलताओं को समझना उतना आसान नहीं है।

कुल मिलाकर, बीजेपी की ये नई रिपोर्ट बताती है कि मैनेजमेंट और संसाधन जुटाने के मामले में आज के दौर में उसका मुकाबला करना किसी भी दूसरी पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती है। चुनावी बिसात पर किसका दांव चलेगा, ये तो वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल फंड की रेस में तो भगवा पार्टी ही सबसे आगे है।