गुप्त फाइलों से हुआ बड़ा खुलासा, जब पुतिन ने जॉर्ज बुश के सामने जताई थी पाकिस्तान के परमाणु बमों पर अपनी गहरी चिंता
News India Live, Digital Desk : अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी-कभी ऐसी चीजें सामने आती हैं, जो हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि दुनिया की सुरक्षा की डोर कितनी कच्ची हो सकती है। हाल ही में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के बीच हुई एक गुप्त बातचीत के सार्वजनिक होने से एक ऐसा ही बड़ा खुलासा हुआ है। इस बातचीत का केंद्र कोई व्यापार या समझौता नहीं था, बल्कि वह मुद्दा था जिससे पूरी दुनिया घबराती है पाकिस्तान के परमाणु हथियार (Nuclear Weapons)।
आखिर पुतिन के मन में क्या डर था?
दस्तावेजों के मुताबिक, पुतिन ने बड़े ही स्पष्ट लहजे में जॉर्ज बुश से अपनी चिंता जाहिर की थी। उनका सवाल पाकिस्तान की सरकार या उसकी सेना की ताकत पर नहीं था, बल्कि असली चिंता इस बात की थी कि क्या ये हथियार वहां पूरी तरह सुरक्षित हैं? पुतिन को डर था कि अगर पाकिस्तान की अंदरूनी हालत कभी खराब होती है, तो ये 'एटम बम' किसी आतंकी गुट या चरमपंथी विचारधारा वाले लोगों के हाथ लग सकते हैं। पुतिन का मानना था कि अगर ऐसा हुआ, तो पूरी दुनिया के लिए वह मंजर किसी तबाही से कम नहीं होगा।
अंधेरे में रखी गई वो गुप्त बातें
जब यह बातचीत हुई थी, तब दुनिया के सामने सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश की जाती थी। लेकिन इन बंद कमरों के भीतर रूस और अमेरिका के दो सबसे बड़े नेता एक ऐसी अनिश्चितता पर बात कर रहे थे, जिसका असर सीधे तौर पर भारत सहित पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ता है। पुतिन ने तो यहाँ तक अंदेशा जताया था कि पाकिस्तान की व्यवस्था के भीतर भी ऐसे तत्व हो सकते हैं जो कट्टरपंथी सोच के प्रति सहानुभूति रखते हों।
अमेरिका का रुख और वह दौर
हैरानी की बात यह है कि उस समय अमेरिका, पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पार्टनर के रूप में देखता था। ऐसे में बुश के लिए पुतिन की इस बात पर पूरी तरह सहमति जताना मुश्किल था, लेकिन वे भी पुतिन के तर्कों को नजरअंदाज नहीं कर पा रहे थे। ये दस्तावेज आज हमें बताते हैं कि उस वक्त रूस का खुफिया विभाग और पुतिन कितनी दूर की सोच रहे थे।
आज ये खबर क्यों ज़रूरी है?
यह खबर हमें याद दिलाती है कि आज भी जब हम परमाणु हथियारों की बात करते हैं, तो उनकी सुरक्षा का मुद्दा सबसे ऊपर होता है। पुतिन और बुश की यह बातचीत सिर्फ इतिहास का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि यह एक सबक भी है। यह हमें बताता है कि पड़ोस में किसी अस्थिर देश के पास विनाशकारी हथियार होना दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों के माथे पर भी पसीना ला सकता है।
क्या सच में पुतिन की वो चिंता जायज थी? आज जिस तरह की राजनीतिक उथल-पुथल हम पाकिस्तान में देख रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि सालों पहले हुई वो बातचीत शायद आज के हालातों की भविष्यवाणी ही थी।