Yoga for Stiff Hips: क्या ऑफिस में घंटों बैठने से आपके कूल्हे हो गए हैं जाम? इन 5 योगासनों से मिनटों में पाएं राहत
नई दिल्ली/लखनऊ। आज की डेस्क जॉब वाली जीवनशैली में घंटों कुर्सी पर बैठे रहना मजबूरी बन गया है। चाहे ऑफिस की डेस्क हो, कार की सीट या घर का सोफा—लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने का सबसे बुरा असर हमारे कूल्हों (Hips) पर पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अधिक बैठने से कूल्हे की मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे न केवल चलने-फिरने में दिक्कत होती है, बल्कि यह पीठ के निचले हिस्से और घुटनों में पुराने दर्द का मुख्य कारण भी बनता है। अगर आप भी इस जकड़न से परेशान हैं, तो योग के ये सरल आसन आपकी मांसपेशियों को फिर से सक्रिय कर सकते हैं।
लो लंज: सिकुड़ी मांसपेशियों को खोलने का अचूक उपाय
लंबे समय तक बैठने से जो मांसपेशियां सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं, उन्हें लो लंज (Anjaneyasana) गहराई से स्ट्रेच करता है। इस आसन में कूल्हों को धीरे से आगे की ओर दबाने से जांघों के सामने के हिस्से में खिंचाव आता है। इसका नियमित अभ्यास आपकी गतिशीलता (Mobility) को बहाल करता है और खड़े होने या चलने के दौरान होने वाली असुविधा को जड़ से खत्म करता है।
तितली और कबूतर मुद्रा: जकड़न पर सीधा प्रहार
कूल्हों और जांघों के भीतरी हिस्से को खोलने के लिए तितली आसन (Butterfly Pose) सबसे सरल और प्रभावी है। यह निष्क्रिय पड़ी नसों में रक्त संचार बढ़ाता है। वहीं, कबूतर मुद्रा (Pigeon Pose) उन लोगों के लिए वरदान है जिनके नितंबों की मांसपेशियां सख्त हो गई हैं। यह आसन कूल्हों की सीमित गति के कारण पीठ पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करता है, जिससे कमर दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
माला और छिपकली मुद्रा: प्राकृतिक लचीलापन वापस लाएं
माला मुद्रा (Malasana) यानी गहरी स्क्वाट पोजीशन कूल्हों के प्राकृतिक लचीलेपन को पुनर्जीवित करती है। यह टखनों और कूल्हों को एक साथ मजबूती प्रदान करती है। इसी तरह, छिपकली मुद्रा (Lizard Pose) उन मांसपेशियों को लक्षित करती है जो बैठने के बाद खड़े होने पर दर्द पैदा करती हैं। ब्लॉक का सहारा लेकर इसे करने से कूल्हों की जकड़न तेजी से दूर होती है।
रिलेक्सेशन के लिए हैप्पी बेबी और लेटे हुए आसन
वर्कआउट के अंत में हैप्पी बेबी पोज़ (Happy Baby Pose) और लेटे हुए बद्ध कोण मुद्रा का अभ्यास रीढ़ की हड्डी और कूल्हों को बिना किसी तनाव के विश्राम देता है। ये आसन न केवल शारीरिक जकड़न को कम करते हैं, बल्कि तंत्रिका तंत्र को शांत कर मानसिक तनाव से भी मुक्ति दिलाते हैं। घुटनों को चौड़ा करके किया जाने वाला शिशु आसन (Child's Pose) कूल्हों के दर्द को कम करने के लिए सबसे आरामदायक अंत माना जाता है।