Yoga for PCOS Management 2026: हार्मोनल संतुलन और मानसिक शांति के लिए 10 सबसे प्रभावी योगासन

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नई दिल्ली। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) आज के समय में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक जटिल चुनौती बन गया है। यह न केवल हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है, बल्कि ऊर्जा, मनोदशा (Mood), पाचन और मासिक धर्म की नियमितता को भी प्रभावित करता है। हालांकि योग PCOS का पूर्ण इलाज नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित और सौम्य योगाभ्यास कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने और श्रोणि क्षेत्र (Pelvic Area) में रक्त संचार बढ़ाने में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। 2026 की इस व्यस्त जीवनशैली में, ये आसन शरीर को हार्मोन नियंत्रित करने के लिए एक शांत और सहायक वातावरण प्रदान करते हैं।

PCOS में योग के 10 विशेष आसन और उनके लाभ

PCOS के प्रबंधन में स्थिरता और आराम सबसे महत्वपूर्ण हैं। नीचे दिए गए आसन इसी सिद्धांत पर आधारित हैं:

प्राणायाम (Deep Breathing): प्रतिदिन कुछ मिनट धीमी गति से नाक से सांस लेना तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। यह चिंता को कम कर हार्मोनल संतुलन का आधार तैयार करता है।

सपोर्टेड तितली मुद्रा (Butterfly Pose): यह आसन कूल्हों और श्रोणि क्षेत्र को धीरे-धीरे खोलता है, जिससे बिना किसी तनाव के प्रजनन अंगों में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है।

कैट-काउ पोज़ (Cat-Cow Pose): रीढ़ की हड्डी की यह हलचल आंतरिक अंगों की मालिश करती है और पाचन क्रिया में सुधार लाती है, जो PCOS में अक्सर बाधित रहती है।

बालासन (Child’s Pose): यह एक शांतिदायक मुद्रा है जो मानसिक थकान को कम करती है और पेट पर हल्का दबाव डालकर स्थिरता का अनुभव कराती है।

सुपाइन फिगर फोर पोज़: पीठ के बल लेटकर किया जाने वाला यह अभ्यास कमर पर दबाव डाले बिना कूल्हों के तनाव को कम करता है।

सुप्त बद्ध कोणासन (Reclined Butterfly): इसे हार्मोनल स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। यह शाम के समय विश्राम और तनाव मुक्ति के लिए आदर्श है।

विपरीत करणी (Legs Up The Wall): यह थकान को मिटाता है और रक्त संचार को शरीर के ऊपरी हिस्से की ओर मोड़ता है, जिससे पैरों का भारीपन दूर होता है।

हल्का पश्चिमोत्तानासन: घुटनों को मोड़कर आगे झुकने से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और पीठ की मांसपेशियों को आराम मिलता है।

आरामदायक लो लंज: यह लंबे समय तक बैठने से कूल्हे की मांसपेशियों में आई जकड़न को दूर कर श्रोणि की गतिशीलता बहाल करता है।

सपोर्टेड ब्रिज पोज़ (Setu Bandhasana): यह एक सौम्य बैकबेंड है जो छाती और कूल्हों को खोलता है, जिससे शरीर में ऊर्जा का संचार बेहतर होता है।

अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

नियमितता का महत्व: सप्ताह में 4-6 दिन, मात्र 15-30 मिनट का अभ्यास करें। याद रखें, एक दिन में ज्यादा व्यायाम करने से बेहतर है रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा अभ्यास करना।

श्वसन तकनीक: हार्मोनल सपोर्ट के लिए सांस लेने (Inhale) की तुलना में सांस छोड़ने (Exhale) का समय थोड़ा लंबा रखें। इससे शरीर 'विश्राम मोड' में आता है।

सावधानी: अत्यधिक गर्मी, बहुत ज़ोरदार सांस लेने वाले व्यायाम या बहुत थका देने वाली वर्कआउट से बचें। PCOS में शरीर को थकाने के बजाय उसे 'रीसेट' करना लक्ष्य होना चाहिए।