Yoga for Hip Stiffness Relief 202: कूल्हों की जकड़न दूर करने और गतिशीलता बढ़ाने के लिए 16 कोमल योगासन
नई दिल्ली। आज की आधुनिक जीवनशैली में घंटों डेस्क पर बैठकर काम करना, शारीरिक सक्रियता की कमी और मानसिक तनाव हमारे शरीर के निचले हिस्से, विशेषकर कूल्हों (Hips) को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। कूल्हों में होने वाली जकड़न न केवल चलने-फिरने में दिक्कत पैदा करती है, बल्कि यह पीठ के निचले हिस्से और घुटनों में दर्द का मुख्य कारण भी बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार, योग एक ऐसा सुरक्षित माध्यम है जो बिना किसी अतिरिक्त दबाव के मांसपेशियों को खोलता है और शरीर में प्राकृतिक लचीलापन बहाल करता है।
यहाँ 16 ऐसे कोमल योगासन दिए गए हैं जो आपके कूल्हों की सेहत सुधारने में जादुई भूमिका निभा सकते हैं:
कूल्हों को आराम देने वाले मुख्य योगासन
अपानआसन (Knee to Chest): पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती तक लाना रीढ़ और कूल्हों के तनाव को कम करता है।
तितली मुद्रा (Butterfly Pose): यह जांघों के भीतरी भाग और जोड़ों को धीरे-धीरे खोलता है, जिससे लचीलापन बढ़ता है।
हैप्पी बेबी पोज़ (Happy Baby Pose): बिना वजन डाले कूल्हों को खोलने के लिए यह सबसे बेहतरीन और आरामदायक आसन है।
पश्चिमोत्तानासन (Seated Forward Bend): यह हैमस्ट्रिंग और पीठ के निचले हिस्से को नियंत्रित खिंचाव देकर मांसपेशियों को आराम देता है।
सुपाइन फिगर फोर (Supine Figure Four): लेटकर किया जाने वाला यह अभ्यास कूल्हों के बाहरी हिस्से की अकड़न को निशाना बनाता है।
सपोर्टेड लो लंज (Supported Low Lunge): यह सिकुड़ी हुई हिप फ्लेक्सर मांसपेशियों को सुरक्षित रूप से खींचता है।
वाइड-नी चाइल्ड पोज़ (Wide-Knee Child’s Pose): कूल्हों को पीछे की ओर झुकाकर किया जाने वाला यह आसन गहरी शांति और खिंचाव प्रदान करता है।
सुप्त बद्ध कोणासन (Reclining Bound Angle): गुरुत्वाकर्षण की मदद से कूल्हों को निष्क्रिय रूप से खोलने के लिए यह आदर्श है।
गतिशीलता और संतुलन बढ़ाने वाले आसन
सपोर्टेड मालासन (Supported Garland Pose): हल्के स्क्वाट के माध्यम से यह कूल्हों की गहराई तक मांसपेशियों को सक्रिय करता है।
कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch): रीढ़ और कूल्हों में हल्की हलचल पैदा कर रक्त संचार को बेहतर बनाता है।
जेंटल लिज़ार्ड पोज़ (Gentle Lizard Pose): भीतरी जांघों के लचीलेपन को बढ़ाने के लिए यह एक प्रभावी आसन है।
सीटेड हिप सर्कल्स (Seated Hip Circles): धीमी गोलाकार गति जोड़ों में 'लुब्रिकेशन' (चिकनाई) बढ़ाती है।
स्टैंडिंग साइड लंज (Standing Side Lunge): पार्श्व गतिशीलता में सुधार के लिए इसे धीरे और सावधानी से करें।
पवनमुक्तासन (Wind-Relieving Pose): यह कूल्हों के साथ-साथ पेट की मांसपेशियों की मालिश कर तनाव दूर करता है।
सुपाइन स्पाइनल ट्विस्ट (Supine Twist): धीरे-धीरे शरीर को घुमाने से नर्वस सिस्टम शांत होता है और जकड़न खुलती है।
सपोर्टेड शवासन (Supported Savasana): घुटनों के नीचे तकिया लगाकर आराम करने से शरीर अभ्यास के लाभों को पूरी तरह आत्मसात कर पाता है।
अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
सांस पर नियंत्रण: योग के दौरान बल प्रयोग न करें। धीमी और नियंत्रित सांस लेने पर ध्यान दें, जिससे मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से रिलैक्स हों।
समय का चुनाव: इन आसनों को आप सुबह के समय या शाम को काम के बाद कर सकते हैं। विशेष रूप से शाम के समय ये आसन दिन भर की थकान मिटाने में सहायक होते हैं।
निरंतरता: जकड़न दूर करने के लिए प्रतिदिन 10-15 मिनट का समय निकालें। कुछ ही हफ्तों में आपको अपनी गतिशीलता में स्पष्ट अंतर महसूस होगा।