यूपी पुलिस भर्ती क्या सपना सच होने से पहले ही टूट जाएगा? उम्र सीमा की जंग में अब अखिलेश यादव की एंट्री

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News India Live, Digital Desk : यूपी पुलिस में कांस्टेबल बनने का सपना यूपी के गाँव-गाँव और गलियों के लड़के-लड़कियां देखते हैं। सालों साल पसीना बहाया जाता है, ग्राउंड पर दौड़ लगाई जाती है और कोचिंग में दिन-रात एक कर दिए जाते हैं। लेकिन सोचिये उस अभ्यर्थी पर क्या बीतती होगी जब पता चले कि जिस भर्ती का वो 4-5 साल से इंतज़ार कर रहा था, जब वो आई तो उसकी उम्र ही निकल चुकी है।

अखिलेश यादव का समर्थन: राजनीति या हकीकत?
इसी 'उम्र की आंधी' में फंसे युवाओं के साथ अब अखिलेश यादव खड़े नज़र आ रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और अपने बयानों के जरिए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की है कि भर्ती प्रक्रियाओं में जो देरी हुई है, उसकी सजा युवाओं को क्यों मिले? उनका तर्क सीधा है अगर वैकेंसी निकालने में सरकार ने समय लिया है, तो छात्रों को 3 से 5 साल की अतिरिक्त छूट मिलनी ही चाहिए।

छात्रों का क्या कहना है?
सोशल मीडिया पर 'UP Police Age Relaxation' जैसे हैशटैग अक्सर ट्रेंड करते रहते हैं। छात्रों का कहना है कि बीच के कुछ सालों में कोरोना और अन्य कारणों से भर्तियां रुकी रहीं। ऐसे में जो युवा उस समय तैयारी कर रहे थे, वे अब आधिकारिक तौर पर 'ओवरएज' (Overage) की कैटेगरी में आ गए हैं। उनका कहना है कि यह उनका आखिरी मौका हो सकता है, और अगर इस बार सरकार ने नियम नहीं बदले, तो उनकी मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी।

सरकार के सामने चुनौती
प्रशासन के लिए यह एक मुश्किल संतुलन है। एक तरफ युवाओं की जायज मांग और भावनात्मक दबाव है, तो दूसरी तरफ कानून और भर्ती प्रक्रिया की सीमाएं। हालांकि, चुनाव और युवाओं की नाराजगी को देखते हुए कई बार सरकारें बीच का रास्ता निकाल लेती हैं। अखिलेश यादव का इस मुद्दे पर खुलकर बोलना निश्चित तौर पर भर्ती बोर्ड (UPPRPB) और प्रदेश सरकार को दोबारा सोचने पर मजबूर कर सकता है।

तैयारी करने वालों के लिए एक सलाह
भले ही उम्र सीमा को लेकर असमंजस हो, लेकिन जो छात्र बाउंड्री लाइन पर हैं, उन्हें अपनी पढ़ाई और फिजिकल ट्रेनिंग कम नहीं करनी चाहिए। अगर शासन स्तर से एक भी साल की राहत मिलती है, तो परीक्षा में मुकाबला बहुत तगड़ा होगा। आखिर में, यह मामला अब सिर्फ नौकरी का नहीं रहा, बल्कि हज़ारों परिवारों के सम्मान और भरोसे से जुड़ गया है।