एशेज में इंग्लैंड की बर्बादी का गुनहगार कौन? अब अपनों ने ही खोली बैजबॉल मैनेजमेंट की पोल

Post

News India Live, Digital Desk : कहते हैं कि वक्त का पहिया घूमते देर नहीं लगती। कुछ समय पहले तक इंग्लैंड की टेस्ट टीम जिस 'बैजबॉल' स्टाइल के दम पर दुनिया भर में शेर बनी फिर रही थी, आज उसी स्टाइल ने उन्हें बीच चौराहे पर खड़ा कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में खेली गई एशेज सीरीज (Ashes 2025-26) में इंग्लैंड की जो दुर्दशा हुई है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि टीम अब फिर से वहीं पहुँच गई है जहाँ से उसने ये नया रास्ता शुरू किया था।

इंग्लैंड की इस हार ने उन 'तीन समझदार चेहरों' पर सवाल खड़े कर दिए हैं जिन्होंने टीम का पूरा ढांचा बदला था—बेन स्टोक्स (कप्तान), ब्रेंडन मैकुलम (कोच) और रॉब की (मैनेजिंग डायरेक्टर)। एक वक्त था जब इन तीनों को 'थ्री वाइज़ मैन' कहा जाता था, लेकिन आज इनकी रणनीतियों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

कहाँ चूक गया बैजबॉल? (The Ashes Nightmare)

अगर आप टेस्ट क्रिकेट फॉलो करते हैं, तो आपने देखा होगा कि इंग्लैंड का 'तेज़-तर्रार' खेलने का तरीका घरेलू पिचों पर तो खूब फला-फूला, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की उछाल वाली पिचों पर उनकी एक न चली। ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों ने मानो इंग्लैंड की बैटिंग की कलई खोलकर रख दी। लोग अब सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या यह सिर्फ अहंकार था कि आप दुनिया के सबसे खतरनाक अटैक के सामने भी आँखें मूँदकर बस शॉट मारना चाहते थे?

जब हार इतनी करारी हो कि टीम 4-0 या 5-0 (जैसा भी रहा हो) से पीछे रह जाए, तो आलोचना होना लाजमी है। पूर्व क्रिकेटरों का कहना है कि सिर्फ निडर होना काफी नहीं होता, टेस्ट क्रिकेट में तकनीक और सब्र भी मायने रखता है, जो इस सीरीज में इंग्लैंड के पास कहीं नहीं दिखा।

बेन स्टोक्स और मैकुलम के सामने बड़ी चुनौती

एक कप्तान के तौर पर बेन स्टोक्स (Ben Stokes) की दिलेरी को कोई कम नहीं आंकता, लेकिन ऑस्ट्रेलिया में उनकी अपनी फॉर्म और फैसले कई बार समझ से परे थे। कोच ब्रेंडन मैकुलम (Brendon McCullum), जो इस बैजबॉल के असली जन्मदाता माने जाते हैं, उन पर अब सबसे ज्यादा दबाव है।

अक्सर कहा जाता है कि जब टीम जीतती है, तो आपकी गलतियाँ छिप जाती हैं। लेकिन जब आप बुरी तरह हारते हैं, तो हर छोटी गलती बड़ा पहाड़ बन जाती है। रॉब की, जिन्होंने इस जोड़ी को चुनने का रिस्क लिया था, उनके पास भी अब उन आलोचनाओं का जवाब देने के लिए बहुत कम दलीलें बची हैं।

अब आगे क्या होगा?

इंग्लैंड क्रिकेट के गलियारों में हलचल तेज़ है। क्या मैनेजमेंट अब अपनी अप्रोच बदलेगा या इसी ज़िद पर अड़ा रहेगा? फैन्स का गुस्सा इस बात पर है कि ऑस्ट्रेलिया में जीतने का एक बड़ा मौका आपने सिर्फ़ अपनी ज़िद की वजह से गँवा दिया। आने वाले दिनों में कोच मैकुलम और स्टोक्स की कुर्सी पर खतरा तो नहीं, पर उनकी स्वायत्तता (Freedom) पर अंकुश ज़रूर लगाया जा सकता है।

सच तो यह है कि 'एशेज' सिर्फ एक सीरीज नहीं है, इंग्लैंड के लिए ये उनका आत्मसम्मान है। और जब आत्मसम्मान को इतनी गहरी चोट पहुँचती है, तो अक्सर बड़े चेहरों की विदाई होती है। अब देखना ये है कि इंग्लैंड अपनी इन गलतियों से क्या सबक लेता है।

क्या आपको भी लगता है कि 'बैजबॉल' टेस्ट क्रिकेट के लिए सही नहीं है? या इंग्लैंड को अपनी इसी स्टाइल पर भरोसा बनाए रखना चाहिए? हमें अपनी राय कमेंट्स में ज़रूर बताएं।