श्री मौर्य के निर्देश, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की परियोजना में देरी पर ठेकेदार सहित जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
19 जनवरी, 2026, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य जी द्वारा 7 जनवरी, 2026 को ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की समीक्षा बैठक में दिए गए थे निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन शुरू हो गया है। इसी क्रम में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के व्यय का पूरा विवरण प्रस्तुत किया गया है।
बैठक में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग हेतु कुल ₹709.88 करोड़ का बजट प्राविधान किया गया है, जिसमें ₹35 लाख पूंजीगत मद में तथा शेष ₹709.53 करोड़ राजस्व मद में शामिल हैं। राजस्व मद में विभाग की मांग के सापेक्ष शासन द्वारा ₹431.03 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है, जो कि कुल बजट का 60.74 प्रतिशत है।
उक्त स्वीकृतियों के सापेक्ष विभागाध्यक्ष द्वारा ₹301.13 करोड़ की धनराशि आवंटित की गई, जिसके सापेक्ष 07 जनवरी, 2026 तक ₹215.19 करोड़ (लगभग 49.92 प्रतिशत) का व्यय सुनिश्चित किया जा चुका है। बैठक में व्यय की गति को और तेज करने तथा स्वीकृत धनराशि का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि उपलब्ध बचतों का उपयोग जनहितकारी कार्यों में किया जाएगा। कार्यालय व्यय मद की बचत से ₹2.30 करोड़ का पुनर्विनियोग ई-ऑफिस के संचालन हेतु प्रस्तावित है, जिस पर शासन स्तर पर आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग से परामर्शानुसार कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। इसके अतिरिक्त, निदेशालय में ई-ऑफिस संचालन के अंतर्गत अभिलेखों एवं पत्रावलियों के डिजिटलीकरण हेतु ₹2.07 करोड़ के पुनर्विनियोग का प्रस्ताव भी किया गया है। इसी प्रकार, वेतन मद की बचत से ₹405 लाख के पुनर्विनियोग का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है, जिसे वित्त विभाग द्वारा अनुमोदित किया गया है।
उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत धनराशि का समुचित, पारदर्शी एवं समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। जिन मदों में पुनर्विनियोग की आवश्यकता हो, वहां बचत के सापेक्ष समय से औचित्य सहित प्रस्ताव शासन को प्रेषित किए जाएं, ताकि विभागीय योजनाओं एवं परियोजनाओं का क्रियान्वयन बिना किसी अवरोध के किया जा सके।
समीक्षा के दौरान उप मुख्यमंत्री जी ने विभागीय अधिकारियों को कार्यशैली में सुधार लाने और विकास कार्यों में गति लाने के लिए निम्नलिखित कड़े निर्देश जारी किए हैं-
1. लापरवाह ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश
उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जो ठेकेदार मानक के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं या अनावश्यक देरी कर रहे हैं, उन्हें चिह्नित कर ब्लैकलिस्ट किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की कोताही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
2. 15 दिवस के भीतर स्थलीय निरीक्षण
उच्च अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि अगले 15 दिनों के भीतर सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य रूप से करें। निरीक्षण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी ताकि वास्तविक प्रगति का आकलन किया जा सके।
3. समयबद्धता और गुणवत्ता पर जोर
डेडलाइन का पालन, सभी परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले हर हाल में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि आवंटित बजट का शत-प्रतिशत सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।
4. अधिकारियों की जवाबदेही
उन्होने कहा कि यदि किसी परियोजना में देरी पाई जाती है, तो न केवल ठेकेदार बल्कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रतन सिंह सूचना अधिकारी उपमुख्यमंत्री।