भारत के किस राज्य पर है सबसे ज़्यादा कर्ज? आरबीआई की रिपोर्ट ने खोली अर्थव्यवस्था की पोल
News India Live, Digital Desk : कर्ज... यह एक ऐसा शब्द है जिसे सुनते ही आम इंसान हो या सरकार, माथे पर शिकन आ ही जाती है। हम अक्सर अपने घर के बजट को लेकर परेशान रहते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस राज्य में आप रहते हैं, उसका बजट कैसा चल रहा है? क्या आपका राज्य कमाई से ज्यादा खर्च कर रहा है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में राज्यों की माली हालत पर कुछ आंकड़े (डेटा) सामने रखे हैं। ये आंकड़े सिर्फ़ नंबर्स नहीं हैं, बल्कि यह बताते हैं कि आपके राज्य का भविष्य किस दिशा में जा रहा है। आइए, बिना किसी भारी-भरकम इकोनॉमिक्स के, आसान भाषा में समझते हैं पूरी कहानी।
कौन है कर्ज लेने में सबसे आगे?
अक्सर जब हम 'गरीबी' या 'पिछड़ेपन' की बात करते हैं, तो जुबान पर यूपी या बिहार का नाम आता है। लेकिन कर्ज लेने (Market Borrowing) के मामले में कहानी थोड़ी अलग है। आरबीआई के ताज़ा संकेतों के मुताबिक, तमिलनाडु जैसे विकसित माने जाने वाले राज्य भी उधारी लेने की लिस्ट में काफी ऊपर हैं।
दरअसल, जो राज्य अपनी विकास योजनाओं (सड़क, पुल, मेट्रो आदि) पर ज्यादा खर्च करते हैं, उन्हें बाजार से कर्ज उठाना पड़ता है। इसे तकनीकी भाषा में राजकोषीय घाटा या 'ग्रॉस फिस्कल डेफिसिट' (GFD) कहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो—'आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया' वाली स्थिति को भरने के लिए लिया गया पैसा।
यूपी की कहानी: सपना बड़ा, तो चुनौतियां भी बड़ीं
उत्तर प्रदेश की बात करें तो वहां की सरकार ने '1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी' बनने का बड़ा सपना देखा है। जब लक्ष्य इतना बड़ा हो, तो जाहिर है इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च भी भारी-भरकम होगा। यूपी कर्ज जरूर ले रहा है, लेकिन आर्थिक जानकारों का मानना है कि अगर कर्ज का पैसा पुल, एक्सप्रेस-वे और फैक्ट्री लगाने में खर्च हो रहा है, तो यह 'अच्छा कर्ज' (Good Debt) है, क्योंकि इससे भविष्य में कमाई बढ़ेगी। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि यूपी को अपने खर्चों और कमाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए कड़ी मशक्त करनी पड़ रही है।
बिहार का हाल क्या है?
बिहार की स्थिति थोड़ी नाज़ुक है। बिहार एक ऐसा राज्य है जो अपने संसाधनों से ज्यादा केंद्र सरकार की मदद और टैक्स के हिस्से पर निर्भर रहता है। वहां उद्योग-धंधों की कमी के कारण राज्य की अपनी कमाई कम है। ऐसे में, अगर कर्ज बढ़ता है, तो यह चिंता की बात हो सकती है।
बाकी राज्यों का गणित
महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य भी कर्ज के बोझ से अछूते नहीं हैं। कई राज्य ऐसे हैं जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ़ पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही खर्च कर दे रहे हैं। पंजाब का उदाहरण अक्सर दिया जाता है, जहाँ कर्ज का अनुपात काफी चिंताजनक स्थिति में पहुँच चुका है।
आम आदमी को इससे क्या फर्क पड़ता है?
आप सोच रहे होंगे कि सरकार कर्ज ले, हमें क्या? फर्क पड़ता है! जब राज्य पर कर्ज बढ़ता है, तो:
- महंगाई: सरकार अपना खजाना भरने के लिए टैक्स (पेट्रोल-डीजल, बिजली दरें) बढ़ा सकती है।
- विकास कार्य ठप: अगर सारा पैसा ब्याज चुकाने में जाएगा, तो नए स्कूल-अस्पताल कैसे बनेंगे?
- नौकरियां: निवेश कम होने से नई सरकारी और प्राइवेट नौकरियों पर कैंची चल सकती है।