पद्म पुरस्कार या चुनाव जीतने का फार्मूला? कार्टी चिदंबरम ने सरकार की नीयत पर उठाया बड़ा सवाल

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News India Live, Digital Desk : हर साल 26 जनवरी की पूर्व संध्या पर जब पद्म पुरस्कारों (Padma Awards) का ऐलान होता है, तो पूरा देश उन 'गुदड़ी के लालों' और महान हस्तियों को सलाम करता है जिन्हें यह सम्मान मिलता है। लेकिन, इस बार की खुशियों के बीच थोड़ी राजनीतिक खटास भी घुल गई है। कांग्रेस सांसद कार्टी चिदंबरम ने सरकार की मंशा पर एक तीखा सवाल दाग दिया है।

अगर आपने इस साल की पद्म पुरस्कारों की लिस्ट गौर से देखी हो, तो कार्टी चिदंबरम का कहना है कि आपको उसमें एक ख़ास "पैटर्न" नज़र आएगा।

"जहाँ चुनाव, वहां सम्मान?"

शिवगंगा से सांसद कार्टी चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर साफ़ लफ्जों में कहा है कि यह लिस्ट देखकर उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई। उनके मुताबिक, सरकार ने उन लोगों को या उन राज्यों को ज़्यादा तवज्जो दी है, जहाँ आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।

साधारण भाषा में समझें तो उनका आरोप है कि सरकार सम्मान देकर वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रही है। उनका इशारा सीधे तौर पर बिहार (Bihar) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) की तरफ है। बता दें कि बिहार में अगले साल और पश्चिम बंगाल में उसके बाद चुनाव होने की हलचल है।

काबिलियत बनाम राजनीति

कार्टी ने अपने बयान में एक बहुत गहरी बात कही। उन्होंने कहा कि पहले पद्म पुरस्कार उन लोगों को मिलते थे जिनमें एक अलग तरह का जज़्बा या "Grit" (दृढ़ संकल्प) होता था। वे ऐसे लोग होते थे जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के समाज को बदला। लेकिन अब? अब उन्हें लगता है कि लिस्ट में उन राज्यों के लोगों को खोज-खोज कर डाला जाता है, जो सत्ताधारी पार्टी के चुनावी गणित में फिट बैठते हैं।

इस बार बिहार और बंगाल से कई हस्तियों को चुना गया है। हालाँकि, यह कहना गलत होगा कि जिन्हें सम्मान मिला वे इसके हकदार नहीं थे (जैसे ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह को मरणोपरांत या सुपर 30 के आनंद कुमार), लेकिन विपक्ष का सवाल टाइमिंग और चयन के पीछे की मंशा को लेकर है।

यह कोई नई बात नहीं

दोस्तों, वैसे देखा जाए तो पुरस्कारों पर राजनीति होना हमारे देश में कोई नई बात नहीं है। हर सरकार पर अपने चहेतों या अपने फायदों के हिसाब से अवॉर्ड देने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन कार्टी चिदंबरम ने जिस बेबाकी से इसे 'अनुमान लगाने योग्य' (Predictable) बताया है, उसने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

अब यह जनता को तय करना है—क्या वाकई यह सिर्फ़ चुनावी रणनीति है, या फिर यह महज़ एक संयोग है कि चुनावी राज्यों से इतनी प्रतिभाएं निकलकर सामने आईं?

खैर, राजनीति अपनी जगह है और सम्मान अपनी जगह। लेकिन इतना तो तय है कि इस बयान ने पद्म पुरस्कारों की मिठास में थोड़ी मिर्च तो लगा ही दी है।