यूजीसी नियम 2026 और विकास दिव्यकीर्ति आरक्षण, सोशल जस्टिस और फियर साइकोसिस' पर क्या है उनकी राय?
News India Live, Digital Desk: उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के लिए लाए गए UGC रेगुलेशन 2026 को लेकर मचे बवाल के बीच दृष्टि आईएएस के संस्थापक डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का बयान सामने आया है। एक तरफ जहां सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी है, वहीं दिव्यकीर्ति ने इस मुद्दे पर 'सोशल जस्टिस' और 'सावधानी' के बीच का रास्ता सुझाया है।
आरक्षण और सोशल जस्टिस पर दिव्यकीर्ति का स्टैंड
एएनआई (ANI) को दिए इंटरव्यू में विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह आरक्षण के विरोधी नहीं हैं।
जनरल कैटेगरी और समर्थन: उन्होंने कहा, "मैं बाय चांस जनरल कैटेगरी से हूं, लेकिन मैं आरक्षण और सोशल जस्टिस का हमेशा से समर्थक रहा हूं।"
नीतिगत विरोध: दिव्यकीर्ति ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का समर्थक होने का मतलब यह नहीं है कि उससे जुड़ी हर नीति के हर बिंदु को आंख मूंदकर मान लिया जाए। अगर किसी नियम में खामी है, तो उसका विरोध करना वाजिब है।
नए नियमों पर राय: "सावधानी की कमी और फियर साइकोसिस"
यूजीसी के नए नियमों को लेकर समाज में जो डर का माहौल है, उस पर दिव्यकीर्ति ने 'फियर साइकोसिस' (डर का मनोविज्ञान) शब्द का इस्तेमाल किया।
हड़बड़ी में बने नियम: उन्होंने कहा कि ये रेगुलेशंस बहुत अच्छे हो सकते थे, लेकिन इन्हें बनाने में थोड़ी हड़बड़ी दिखाई गई है। यदि थोड़ी और सावधानी बरती जाती, तो शायद इतना विवाद नहीं होता।
डर की वजह: उनके अनुसार, समाज में जितना डर दिख रहा है, स्थिति उतनी भयावह नहीं है। कभी-कभी बातें बढ़ा-चढ़ाकर बताई जाती हैं जिससे लोग घबरा जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और 'समानता समितियां'
सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों पर रोक लगाते हुए केंद्र और यूजीसी को नोटिस जारी किया है। विवाद की मुख्य जड़ें निम्नलिखित बिंदुओं में छिपी हैं:
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| समानता समितियां | नए नियमों के तहत हर संस्थान में एक कमेटी बनाना अनिवार्य था, जिसमें SC, ST, OBC, महिला और दिव्यांग सदस्य हों। |
| भेदभाव की परिभाषा | याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियम 3(सी) में भेदभाव को केवल SC/ST/OBC के संदर्भ में परिभाषित किया गया है, जो 'गैर-समावेशी' है। |
| सुप्रीम कोर्ट की रोक | सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने भाषा को अस्पष्ट बताते हुए 19 मार्च तक रोक लगा दी है। |
क्या है विवाद का असली कारण?
विवाद तब शुरू हुआ जब 13 जनवरी को यूजीसी ने नए नियम अधिसूचित किए। इन नियमों में जाति-आधारित भेदभाव को इस तरह परिभाषित किया गया कि सामान्य वर्ग के छात्रों को लगा कि वे इस सुरक्षा कवच से बाहर हैं। साथ ही, अलग-अलग समुदायों के लिए विशेष व्यवस्थाओं के प्रस्ताव ने सवर्ण वर्ग में नाराजगी पैदा कर दी।
विकास दिव्यकीर्ति का मानना है कि नीति निर्माण में समावेशिता (Inclusivity) का ध्यान रखना जरूरी है ताकि किसी भी वर्ग को यह न लगे कि उसके साथ अन्याय हो रहा है।