अजित पवार विमान हादसा क्या सिस्टम की कमी ने ली जान? बारामती एयरस्ट्रिप पर ILS न होना बना सबसे बड़ा विलेन

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News India Live, Digital Desk : महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत ने भारत के छोटे और अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड्स की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के खुलासे से साफ है कि यदि बारामती एयरपोर्ट पर आधुनिक लैंडिंग तकनीक होती, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

विजिबिलिटी 0 और सिस्टम 'नदारद': हादसे की इनसाइड स्टोरी

बुधवार सुबह जब अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन बारामती पहुंचा, तो वहां घना कोहरा था। जांच में सामने आए मुख्य तथ्य इस प्रकार हैं:

ILS (इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम) की कमी: बारामती एयरस्ट्रिप पर ILS की सुविधा नहीं है। यह वह रेडियो नेविगेशन प्रणाली है जो कोहरे या बारिश में पायलट को रनवे की सटीक लोकेशन और ऊंचाई का सिग्नल देती है। इसके बिना पायलट को केवल अपनी आंखों (Manual Landing) पर भरोसा करना पड़ता है।

पायलट की मजबूरी: 28 जनवरी की सुबह विजिबिलिटी बेहद कम थी। ILS न होने के कारण एटीसी ने पायलट को 'मैनुअल लैंडिंग' की सलाह दी।

दूसरा प्रयास बना घातक: कैप्टन सुमित कपूर ने पहली बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन रनवे नहीं दिखने पर वे विमान को वापस ऊपर ले गए। 8:44 बजे जब वे दूसरा चक्कर (Go-around) लगाकर उतरने की कोशिश कर रहे थे, तभी प्लेन रनवे के किनारे क्रैश हो गया।

 क्या बारामती हवाई पट्टी 'लावारिस' है?

एविएशन एक्सपर्ट्स और पूर्व पायलट एहसान खालिद के अनुसार, बारामती एयरफील्ड की स्थिति जोखिम भरी है:

अनकंट्रोल्ड एयरफील्ड: यह एयरपोर्ट भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के एटीसी टावर के बिना काम करता है। यहां का एयर ट्रैफिक स्थानीय फ्लाइंग स्कूलों के इंस्ट्रक्टर संभालते हैं।

ट्रेनिंग ग्राउंड: मुख्य रूप से इसका इस्तेमाल पायलट ट्रेनिंग के लिए होता है, इसलिए यहां बड़े वीआईपी विमानों के लिए जरूरी नेविगेशनल एड्स का अभाव है।

 आखिरी 26 मिनट का घटनाक्रम (8:18 AM - 8:44 AM)

समयगतिविधि
08:18 AMविमान बारामती एटीसी के संपर्क में आया। विजिबिलिटी कम होने की जानकारी दी गई।
08:25 AMपायलट को मैनुअल लैंडिंग का सुझाव दिया गया। पहला प्रयास विफल रहा।
08:35 AMविमान आसमान में घेरा (Orbit) बना रहा था ताकि रनवे साफ दिखे।
08:44 AMदूसरे प्रयास के दौरान प्लेन रनवे के किनारे टकराया। धमाका हुआ और आग लग गई।

 अनुभवी पायलट भी नहीं बचा सके जान

हादसे के वक्त कॉकपिट में बेहद अनुभवी टीम थी, जो विमान की तकनीकी विफलता के बजाय 'सिस्टम की कमी' की ओर इशारा करती है:

कैप्टन सुमित कपूर (61): 15,000 से ज्यादा घंटों का फ्लाइंग अनुभव।

फर्स्ट ऑफिसर शांभवी पाठक (25): 1,500 घंटों का अनुभव।

अन्य मृतक: डिप्टी सीएम के पीएसओ विदिप जाधव और फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली।

 जांच की दिशा

नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने पुष्टि की है कि एटीसी और क्रू की बातचीत से साफ है कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा था। फिलहाल DGCA और AAIB (एक्सीडेंट एयरक्राफ्ट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो) ब्लैक बॉक्स के जरिए यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या विमान में अंतिम क्षणों में कोई यांत्रिक खराबी भी आई थी।