Weight Loss Tips: बिना जिम और दवा के मक्खन की तरह पिघलेगी चर्बी! जानें क्या है 'टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग' और इसके फायदे

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नई दिल्ली/ब्यूरो: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और खराब खानपान के कारण मोटापा एक वैश्विक समस्या बन चुका है। वजन घटाने के लिए लोग घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, डाइटिंग करते हैं और न जाने कितनी दवाओं का सहारा लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना किसी कठोर एक्सरसाइज के भी केवल अपने 'खाने के समय' को नियंत्रित करके आप वजन कम कर सकते हैं? आजकल 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' की तरह ही 'टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग' (Time-Restricted Eating) का चलन काफी बढ़ गया है। यह न केवल वजन घटाने में कारगर है, बल्कि शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है।

क्या है टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग?

टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग खाने का एक ऐसा तरीका है जिसमें आप दिनभर कुछ भी खाने के बजाय अपने भोजन का एक निश्चित समय तय कर लेते हैं। इसमें व्यक्ति को दिन के 24 घंटों में से केवल 8 से 10 घंटे के बीच ही भोजन करना होता है, जबकि बाकी के 14 से 16 घंटे तक उसे उपवास (Fasting) रखना पड़ता है।

दिल्ली के जीटीबी अस्पताल की मशहूर डायटिशियन डॉ. अनामिका गौर के अनुसार, "इसका सीधा गणित यह है कि अगर आप सुबह 9 बजे अपना पहला भोजन लेते हैं, तो शाम 5 बजे तक अपना आखिरी भोजन कर लें। इसके बाद अगले दिन सुबह 9 बजे तक यानी करीब 16 घंटे तक आपको कुछ भी ठोस नहीं खाना है। इस दौरान आप केवल पानी, नारियल पानी या बिना चीनी वाली ग्रीन टी का सेवन कर सकते हैं।"

शरीर के अंदर कैसे काम करती है यह प्रक्रिया?

अक्सर लोग सोचते हैं कि भूखे रहने से कमजोरी आएगी, लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है। डॉ. अनामिका बताती हैं कि जब हम 16 घंटे तक कुछ नहीं खाते, तो हमारे मेटाबॉलिज्म (Metabolic Process) को आराम मिलता है। इस दौरान जब शरीर को ऊर्जा की जरूरत होती है और उसे बाहर से खाना नहीं मिलता, तो वह शरीर में पहले से जमा 'फैट' (Fat) को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर देता है।

इसके अलावा, 16 घंटे के उपवास के दौरान शरीर के पाचन अंगों को भी पर्याप्त विश्राम मिलता है। इस समय शरीर अपनी 'इंटरनल रिपेयरिंग' (Self-Repair) करता है, जिसमें खर्च होने वाली ऊर्जा भी जमा चर्बी से ही आती है। इससे न केवल वजन कम होता है, बल्कि शरीर के अंदरूनी घाव और छोटी-मोटी दिक्कतें भी खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं।

वजन के साथ इन बीमारियों में भी मिलता है आराम

टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष लाभ वजन घटाने में मिलता है, क्योंकि इससे शरीर का कैलोरी इनटेक अपने आप कम हो जाता है। इसके अलावा, कई शोधों में यह दावा किया गया है कि खाने का यह तरीका टाइप-2 डायबिटीज (Type-2 Diabetes) के मरीजों के लिए रामबाण है, क्योंकि यह शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करता है। हृदय संबंधी रोगों और हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) को कंट्रोल करने में भी यह विधि बेहद प्रभावी मानी गई है। साथ ही, यह पाचन तंत्र को मजबूत कर पेट की समस्याओं से राहत दिलाती है।

सावधानी: इन लोगों को भूलकर भी नहीं अपनाना चाहिए यह तरीका

भले ही टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग के कई फायदे हों, लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को इसे बिल्कुल फॉलो नहीं करना चाहिए, क्योंकि उन्हें और उनके बच्चे को निरंतर पोषण की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, बुजुर्गों, एथलीटों और किसी गंभीर पुरानी बीमारी से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टरी सलाह के यह डाइट प्लान शुरू नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार के बदलाव से पहले अपने चिकित्सक या डायटिशियन से परामर्श लेना अनिवार्य है।