Vedic Wisdom : खाना खाने के बाद क्यों लिया जाता है कुंभकर्ण और भीम का नाम? जानें इसके पीछे का हैरान करने वाला ज्योतिषीय तर्क
News India Live, Digital Desk : भारतीय संस्कृति में भोजन को केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि एक 'यज्ञ' माना गया है। शास्त्रों में भोजन करने के नियम और उसके बाद की क्रियाओं का विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं परंपराओं में से एक है भोजन के उपरांत कुंभकर्ण, भीम और जठराग्नि के मंत्रों का उच्चारण।
क्यों लिया जाता है कुंभकर्ण का नाम?
रामायण के पात्र कुंभकर्ण अपनी लंबी नींद और भारी भोजन के लिए जाने जाते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंभकर्ण का नाम लेने के पीछे का उद्देश्य 'अति-निद्रा' और 'आलस्य' को दूर भगाना है।
मनोवैज्ञानिक कारण: जब हम कुंभकर्ण का नाम लेते हैं, तो हम खुद को सचेत करते हैं कि हमें भोजन के बाद उसकी तरह महीनों तक सोना नहीं है, बल्कि ऊर्जावान बने रहना है।
पाचन का संकेत: कुंभकर्ण की भोजन शक्ति अपार थी, उसे याद करने से शरीर को मानसिक संदेश जाता है कि भारी भोजन को भी आसानी से पचाना है।
महाबली भीम का नाम लेने का रहस्य
महाभारत के भीम को 'वृकोदर' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है—जिसके पेट में 'वृक' नामक अग्नि हो।
जठराग्नि को सक्रिय करना: भीम का नाम लेने से हमारे शरीर के भीतर की जठराग्नि (Digestive Fire) को प्रोत्साहन मिलता है।
पाचन शक्ति: भीम जितना खाते थे, उतनी ही तेजी से उसे पचाकर शक्ति में बदल लेते थे। भोजन के बाद उनका नाम लेना अच्छी पाचन शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
शास्त्रों में वर्णित श्लोक
भोजन के बाद केवल नाम ही नहीं, बल्कि एक विशेष श्लोक का जाप करने की परंपरा है:
"अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च बडवानलम्। आहार परिणामार्थं संस्मरेच्च वृकोदरम्॥"
इसका अर्थ है: भोजन को सही ढंग से पचाने के लिए अगस्त्य मुनि, कुंभकर्ण, शनि देव, बडवानल (समुद्र की अग्नि) और वृकोदर (भीम) का स्मरण करना चाहिए। माना जाता है कि अगस्त्य मुनि ने तो पूरा समुद्र ही पी लिया था, इसलिए उनका नाम लेने से भारी से भारी भोजन पच जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्या कहता है विज्ञान?
विज्ञान के अनुसार, भोजन के बाद शरीर का रक्त प्रवाह पाचन तंत्र की ओर मुड़ जाता है, जिससे मस्तिष्क में सुस्ती आने लगती है। जब हम किसी विशेष नाम का उच्चारण करते या मंत्र पढ़ते हैं, तो:
हमारा ध्यान केंद्रित होता है।
शरीर में एक सकारात्मक कंपन पैदा होता है।
मानसिक रूप से हम आलस्य से लड़ने के लिए तैयार होते हैं।
भोजन के बाद के अन्य जरूरी नियम:
वज्रासन: भोजन के बाद 5-10 मिनट वज्रासन में बैठने से पाचन तेज होता है।
बाईं करवट सोना: यदि लेटना हो, तो हमेशा बाईं करवट (Left Side) लेटें, इससे आमाशय की स्थिति भोजन को जल्दी पचाने में मदद करती है।