Bollywood Highlights : आज भी पुरुषों को वर्जिन दुल्हन ही चाहिए, नीना गुप्ता ने भारतीय समाज के दोहरेपन को किया बेनकाब

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News India Live, Digital Desk : बॉलीवुड की 'मसाबा मसाबा' और 'बधाई हो' जैसी फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंग का लोहा मनवा चुकीं नीना गुप्ता ने एक बार फिर समाज के उन पहलुओं पर चोट की है जिन्हें अक्सर पर्दे के पीछे रखा जाता है। नीना ने कहा कि चाहे जमाना कितना भी आधुनिक हो गया हो, लेकिन जब शादी की बात आती है, तो भारतीय पुरुषों की सोच आज भी पुरानी सदियों में अटकी हुई है।

'वर्जिनिटी' पर नीना का कड़ा प्रहार

नीना गुप्ता ने कहा कि शिक्षा और तकनीक के प्रसार के बावजूद, भारतीय समाज में पुरुषों की मानसिकता नहीं बदली है।

दोहरा मानदंड: "एक तरफ पुरुष चाहते हैं कि उनकी गर्लफ्रेंड मॉडर्न और बिंदास हो, लेकिन जब शादी के लिए लड़की चुनने की बारी आती है, तो उन्हें आज भी ऐसी दुल्हन चाहिए जो 'वर्जिन' हो।"

सच्चाई का सामना: अभिनेत्री के अनुसार, यह सोच दिखाती है कि हम ऊपर से भले ही कितने प्रोग्रेसिव दिखें, लेकिन अंदर से हमारी जड़ें अभी भी पितृसत्तात्मकता में गहराई से धंसी हुई हैं।

घूंघट और बहुओं पर पाबंदी

नीना ने ग्रामीण और शहरी भारत के बीच के विरोधाभास पर भी बात की। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे आज भी कई घरों में बहुओं को अपनी पहचान दबानी पड़ती है:

"भारत में आज भी ऐसी जगहें हैं जहाँ बहू को घूंघट में रहना पड़ता है और ससुर के पैर छूने पड़ते हैं। यह केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उस पर थोपी गई अधीनता का प्रतीक है।"

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सम्मान केवल घूंघट या पैर छूने से ही आता है, या यह आपसी समझ और बराबरी का विषय होना चाहिए?

नीना गुप्ता के बयान के प्रमुख बिंदु:

परंपरा बनाम आधुनिकता: उन्होंने कहा कि हम पश्चिमी कपड़ों को तो अपना रहे हैं, लेकिन महिलाओं के प्रति सम्मान और बराबरी की सोच को नहीं।

फिल्मों का प्रभाव: नीना ने जिक्र किया कि सिनेमा में भले ही 'मजबूत महिला' के किरदार दिखाए जा रहे हों, लेकिन असल जिंदगी की हकीकत अभी भी काफी कड़वी है।

युवाओं को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपनी सोच को और अधिक समावेशी और आधुनिक बनाने का आह्वान किया।

सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी

नीना गुप्ता के इस बयान ने इंटरनेट पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां कई महिलाएं उनके समर्थन में कह रही हैं कि उन्होंने उनके मन की बात कही है, वहीं कुछ लोग इसे भारतीय परंपराओं पर हमला मान रहे हैं। हालांकि, नीना ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि उन विसंगतियों को सामने लाना है जो महिलाओं की प्रगति में बाधक हैं।