Surya Grahan 2026 : गर्भवती महिलाएं सावधान ग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये गलतियां, जानें क्या कहता है ज्योतिष और विज्ञान

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News India Live, Digital Desk : आज साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। भले ही भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं है, लेकिन पारंपरिक रूप से गर्भवती महिलाओं को कुछ विशेष सावधानियां बरतने की सलाह दी जाती है।

भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां (Don'ts)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को ग्रहण काल (दोपहर 03:26 से शाम 07:57) के दौरान इन कामों से बचना चाहिए:

नुकीली वस्तुओं का प्रयोग: ग्रहण के दौरान चाकू, कैंची, सुई या किसी भी धारदार वस्तु का उपयोग न करें। माना जाता है कि इससे शिशु के अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।

घर से बाहर निकलना: ग्रहण की सीधी किरणें या छाया गर्भवती महिला पर नहीं पड़नी चाहिए। इसलिए खिड़की और दरवाजों पर पर्दे डालकर अंदर ही रहें।

भोजन बनाना और खाना: ग्रहण काल में भोजन पकाने और खाने की मनाही होती है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से आप फल या जूस ले सकती हैं।

सोने से परहेज: धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण के समय सोने को अशुभ माना गया है। इस दौरान आलस्य से बचना चाहिए।

काटने-छीलने का काम: सब्जी काटना या कपड़े सिलना जैसे कार्यों से इस अवधि में पूरी तरह दूर रहें।

ग्रहण के दौरान क्या करें? (Do's)

नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव को कम करने के लिए ये उपाय लाभकारी माने जाते हैं:

मंत्र जाप: शांत चित्त होकर भगवान विष्णु के मंत्र 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'हनुमान चालीसा' का पाठ करें।

तुलसी का पत्ता: खाने-पीने की पहले से बनी चीजों में तुलसी का पत्ता डाल दें।

गंगाजल का प्रयोग: ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करें और पूरे घर में गंगाजल छिड़कें।

पेट पर गेरू लगाना: कई क्षेत्रों में परंपरा है कि गर्भवती महिलाएं अपने पेट पर गेरू (लाल मिट्टी) का लेप लगाती हैं, जिसे सुरक्षा कवच माना जाता है।

क्या कहता है विज्ञान?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूर्य ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना है। डॉक्टरों का मानना है कि ग्रहण का शिशु पर कोई शारीरिक प्रभाव नहीं पड़ता, जब तक कि आप नंगी आंखों से सूर्य को न देखें। भारत में ग्रहण न दिखने के कारण यहां विकिरण (Radiation) का कोई खतरा नहीं है। अतः महिलाओं को डरने या मानसिक तनाव लेने की आवश्यकता नहीं है।