Mythological Stories : द्रौपदी ने क्यों दिया था भीम के पुत्र घटोत्कच को श्राप? बेहद चौंकाने वाली है यह पौराणिक कथा

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News India Live, Digital Desk : महाभारत का युद्ध केवल अस्त्र-शस्त्रों का नहीं, बल्कि शब्दों और श्रापों का भी युद्ध था। भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच ने युद्ध में पांडवों की ओर से लड़ते हुए अपनी वीरता से कौरवों की सेना में हाहाकार मचा दिया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस वीर योद्धा को खुद उनकी 'बड़ी माँ' द्रौपदी ने एक ऐसा श्राप दिया था, जो उसकी मृत्यु का कारण बना?

जब पहली बार ससुराल पहुंचा घटोत्कच

पौराणिक कथा के अनुसार, जब भीम और हिडिम्बा का पुत्र घटोत्कच पहली बार अपने पिता के घर यानी पांडवों के महल में पहुंचा, तो उसने अपनी माँ हिडिम्बा के आदेशानुसार सबसे पहले पिता भीम और फिर अन्य पांडवों का अभिवादन किया। लेकिन, उसने वहां मौजूद द्रौपदी का सम्मान करने में देरी कर दी या अनजाने में उन्हें अनदेखा कर दिया।

द्रौपदी के अपमान और क्रोध की अग्नि

द्रौपदी, जो पहले से ही इस बात से आहत थीं कि भीम ने एक राक्षसी (हिडिम्बा) से विवाह किया था, घटोत्कच के इस व्यवहार से अत्यंत क्रोधित हो गईं। उन्हें लगा कि एक 'राक्षस पुत्र' ने भरी सभा में एक 'आर्य रानी' का अपमान किया है।

क्रोध के वशीभूत होकर द्रौपदी ने घटोत्कच से कहा:"रे मूर्ख! तूने अपनी राक्षसी माँ के सिखाए अनुसार मेरी उपेक्षा की है। तू भूल गया कि मैं इस कुल की लक्ष्मी और ज्येष्ठ वधू हूँ। जा, मैं तुझे श्राप देती हूँ कि तेरी आयु बहुत कम होगी और तू किसी बड़े युद्ध में बिना किसी कारण के वीरगति को प्राप्त होगा।"

श्राप का युद्ध पर प्रभाव

द्रौपदी का यह श्राप कुरुक्षेत्र के युद्ध में सत्य सिद्ध हुआ। जब कर्ण के पास अर्जुन को मारने के लिए 'अमोघ अस्त्र' (इंद्र द्वारा दी गई शक्ति) थी, तब भगवान कृष्ण ने घटोत्कच को युद्ध के मैदान में उतारा। घटोत्कच ने ऐसा उत्पात मचाया कि दुर्योधन घबरा गया और उसने कर्ण को विवश किया कि वह अपना वह अचूक अस्त्र घटोत्कच पर चला दे।

श्री कृष्ण की लीला और घटोत्कच का बलिदान

कहते हैं कि अगर द्रौपदी का श्राप न होता, तो शायद स्थिति कुछ और होती। लेकिन भगवान कृष्ण जानते थे कि अर्जुन को बचाने के लिए घटोत्कच का बलिदान आवश्यक है। घटोत्कच की मृत्यु के बाद श्री कृष्ण मुस्कुराए थे, क्योंकि उन्हें पता था कि अब अर्जुन सुरक्षित है और कर्ण के पास वह दिव्य अस्त्र नहीं बचा।

मुख्य बिंदु:

अपमान का परिणाम: द्रौपदी का श्राप अहंकार और मर्यादा के उल्लंघन का परिणाम था।

हिडिम्बा का दुख: इस श्राप के कारण हिडिम्बा ने भी द्रौपदी के पुत्रों के लिए कुछ कड़े शब्द कहे थे, जिसका संकेत महाभारत के उत्तरार्ध में मिलता है।

रणनीतिक महत्व: घटोत्कच की मृत्यु ने पांडवों की जीत का मार्ग प्रशस्त किया।