Vande Mataram New Rules : क्या अब वंदे मातरम के सम्मान में खड़ा होना है जरूरी? केंद्र सरकार ने नियमों पर दी बड़ी जानकारी

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News India Live, Digital Desk : राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को लेकर अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या दोनों के लिए प्रोटोकॉल एक जैसे हैं? हाल ही में केंद्र सरकार ने संसद में 'वंदे मातरम' के सम्मान और इससे जुड़े नियमों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। गृह मंत्रालय की ओर से दी गई यह जानकारी हर भारतीय के लिए जाननी जरूरी है।

क्या कहता है आधिकारिक नियम?

सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 51A (a) के तहत राष्ट्रगान और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। हालांकि, 'वंदे मातरम' यानी राष्ट्रगीत के लिए 'जन गण मन' की तरह खड़े होने या कोई विशेष कानूनी बाध्यता (Penal Provisions) अभी तक लागू नहीं की गई है।

राष्ट्रगान बनाम राष्ट्रगीत: क्या है अंतर?

गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रगान के लिए एक निर्धारित समय सीमा (52 सेकंड) और विशेष आचरण संहिता (Code of Conduct) है। लेकिन राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' के लिए ऐसी कोई लिखित नियमावली नहीं है जो इसे अनिवार्य रूप से गाने या इसके दौरान खड़े होने के लिए मजबूर करती हो।

सरकार का रुख: "समान दर्जा, पर नियम अलग"

अदालतों में कई बार ऐसी याचिकाएं दायर की गई हैं जिनमें राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने की मांग की गई है। सरकार का मानना है कि 'वंदे मातरम' भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक ऐतिहासिक प्रतीक है और इसका स्थान भारतीयों के दिलों में सर्वोच्च है। सरकार ने यह भी साफ किया कि वह राष्ट्रगीत के प्रति लोगों की भावनाओं का सम्मान करती है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने के लिए फिलहाल कोई नया कानून लाने का प्रस्ताव नहीं है।