Bangladesh Violence : बांग्लादेश में चुनाव से पहले खौफ पैर बंधे मिले हिंदू युवक के शव से मचा हड़कंप, हत्या की आशंका से तनाव
News India Live, Digital Desk : बांग्लादेश में संसदीय चुनावों के लिए मतदान से कुछ ही दिन पहले सांप्रदायिक हिंसा और लक्षित हत्याओं (Targeted Killings) का सिलसिला तेज हो गया है। हाल ही में एक हिंदू युवक का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ है, जिसके पैर बंधे हुए थे। इस घटना ने एक बार फिर पड़ोसी देश में रह रहे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।
1. घटना का विवरण: बेरहमी की हदें पार
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना मयमनसिंह (Mymensingh) या उसके आसपास के जिले की है, जहाँ युवक को गायब होने के कुछ घंटों बाद मृत पाया गया।
हालत: शव को देखने से प्रतीत होता है कि हत्या से पहले युवक को प्रताड़ित किया गया था। उसके पैर रस्सियों से बंधे हुए थे, जो किसी सोची-समझी साजिश या रंजिश की ओर इशारा करते हैं।
पहचान: स्थानीय पुलिस मृतक की पहचान और हत्या के पीछे के असली मकसद की जांच कर रही है, लेकिन हिंदू संगठनों ने इसे चुनाव से पहले डराने-धमकाने की रणनीति बताया है।
2. चुनाव से पहले बढ़ता ग्राफ (Pre-poll Violence)
यह पहली घटना नहीं है। पिछले 45 दिनों में (दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक) बांग्लादेश में लगभग 15 हिंदू अल्पसंख्यकों की हत्या की खबरें सामने आई हैं:
सुशेन चंद्र सरकार (फरवरी 2026): त्रिशाल उपजिला में 62 वर्षीय हिंदू कारोबारी की दुकान में घुसकर हत्या कर दी गई और हत्यारे शटर बंद कर भाग गए।
समीर दास (जनवरी 2026): एक ऑटो-चालक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई।
दीपू चंद्र दास (दिसंबर 2025): मयमनसिंह में ही भीड़ ने 'ईशनिंदा' के झूठे आरोप में युवक को पीट-पीटकर मार डाला और शव को जला दिया।
3. हिंदू समुदाय में डर और गुस्सा
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) ने अंतरिम सरकार और चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पलायन का खतरा: कई हिंदू परिवारों ने हिंसा के डर से अपने गांवों से पलायन करना शुरू कर दिया है।
भारत की चिंता: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे इन हमलों को 'भयावह' (Horrendous) करार देते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है।
4. पुलिस और प्रशासन का पक्ष
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि वे इन मामलों को 'व्यक्तिगत रंजिश' या 'आपराधिक घटनाओं' के रूप में देख रहे हैं और चुनाव से पहले सुरक्षा बढ़ा दी गई है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि दोषियों की गिरफ्तारी न होना और 'मॉब लिंचिंग' (भीड़ द्वारा हत्या) को उत्सव की तरह मनाना अपराधियों के हौसले बढ़ा रहा है।