Lavrov on BRICS vs NATO : लावरोव ने पश्चिम पर साधा निशाना बोले- ब्रिक्स में सबकी चलती है, नाटो में सिर्फ अमेरिका कहता है चुप रहो

Post

News India Live, Digital Desk : रूस के अनुभवी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने एक बार फिर दुनिया को यह समझाने की कोशिश की है कि भविष्य 'बहुध्रुवीय' (Multipolar) है। एक ताजा इंटरव्यू में उन्होंने अमेरिका के नेतृत्व वाले सैन्य संगठन नाटो और उभरते हुए संगठन ब्रिक्स के बीच की गहरी खाई को उजागर किया। लावरोव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूस और पश्चिम के बीच तनाव चरम पर है।

लावरोव के बयानों के मुख्य अंश:

आम सहमति (Consensus) बनाम हुक्म: लावरोव ने कहा कि ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे मंचों पर कोई भी निर्णय आम सहमति से लिया जाता है। इसके विपरीत, नाटो में केवल वाशिंगटन की आवाज सुनाई देती है। उन्होंने कटाक्ष किया, "नाटो में अमेरिकी बस इतना कहते हैं—चुप रहो, और बाकी सब उसे मान लेते हैं।"

पश्चिम की 'आधिपत्य' की जिद: रूसी विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका अब भी पुरानी दुनिया के वर्चस्व को बचाए रखने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जब भी कोई नया केंद्र (जैसे ब्रिक्स देश) आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो पश्चिम उसे प्रतिबंधों और दबाव के जरिए रोकने की कोशिश करता है।

भारत की तारीफ और समर्थन: लावरोव ने 1 जनवरी 2026 से शुरू हुई भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत का 'काउंटर-टेररिज्म' और 'एनर्जी सिक्योरिटी' का एजेंडा आज के दौर की सबसे बड़ी जरूरत है और रूस इसमें भारत का पूरा साथ देगा।

ब्रिक्स और नाटो: काम करने के तरीके में अंतर

लावरोव ने दोनों संगठनों की तुलना कुछ इस प्रकार की:

विशेषताब्रिक्स (BRICS)नाटो (NATO)
निर्णय प्रक्रियाआम सहमति (सभी की रजामंदी)अमेरिका का शीर्ष नेतृत्व (Top-down)
मुख्य सिद्धांतसंप्रभुता और समानतासैन्य गठबंधन और पश्चिमी विस्तार
आर्थिक दृष्टिकोणवैश्विक दक्षिण (Global South) का उदयडॉलर का वर्चस्व और प्रतिबंध
भारत की भूमिकाप्रमुख भागीदार और 2026 अध्यक्षकेवल एक रणनीतिक सहयोगी (सदस्य नहीं)

अमेरिकी तेल प्रतिबंधों पर तंज

लावरोव ने अमेरिका पर भारत जैसे देशों को रूस से सस्ता तेल खरीदने से रोकने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका टैरिफ और डर की राजनीति कर रहा है, जबकि रूस अपने सहयोगियों के साथ "समान हितों और पारस्परिक लाभ" के आधार पर व्यापार करना चाहता है