Jharkhand Chaibasa : नक्सली साजिश ने ली दो जान; IED ब्लास्ट के बाद रात भर जंगल में तड़पते रहे ग्रामीण, समय पर नहीं मिला रेस्क्यू

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News India Live, Digital Desk: झारखंड का कोल्हान इलाका एक बार फिर निर्दोष ग्रामीणों के खून से लाल हो गया है। टोंटो थाना क्षेत्र के पातातोरब जंगल में लकड़ी चुनने गए दो ग्रामीणों की नक्सलियों द्वारा लगाए गए प्रेशर बम की चपेट में आने से मौत हो गई। मृतकों की पहचान सपन अंगरिया और कृष्णा चंपिया के रूप में हुई है।

1. घटना का विवरण (The Tragic Timeline)

धमाका: बुधवार की शाम जब दोनों ग्रामीण जंगल में थे, तभी उनका पैर नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए IED पर पड़ गया। जोरदार धमाके में दोनों के पैर क्षत-विक्षत हो गए और वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

पूरी रात तड़पते रहे: धमाके की आवाज सुनकर ग्रामीण और परिजन मदद के लिए चिल्लाए, लेकिन घना जंगल, अंधेरा और नक्सलियों द्वारा बिछाए गए अन्य लैंडमाइंस के डर से कोई भी रात में उस स्थान तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

रेस्क्यू की विफलता: बताया जा रहा है कि सुरक्षा बलों को सूचना दी गई थी, लेकिन 'आईईडी जोन' होने के कारण रात में सर्च ऑपरेशन चलाना सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरा था। सुबह जब रेस्क्यू टीम पहुँची, तब तक अत्यधिक खून बह जाने और इलाज न मिलने के कारण दोनों ने दम तोड़ दिया था।

2. कोल्हान जंगल बना 'डेथ जोन'

नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को रोकने के लिए पूरे जंगल में जगह-जगह प्रेशर आईईडी (Pressure IED) बिछा रखे हैं।

सॉफ्ट टारगेट: सुरक्षा बलों के बजाय अक्सर स्थानीय ग्रामीण, मवेशी और लकड़ी चुनने वाली महिलाएं इन बमों का शिकार बन रहे हैं।

दहशत का माहौल: पिछले एक साल में चाईबासा के जंगलों में एक दर्जन से अधिक ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं या अपाहिज हो चुके हैं।

3. ग्रामीणों में आक्रोश

इस घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ नक्सली उन्हें अपनी साजिश का शिकार बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासन की रेस्क्यू टीम भी समय पर मदद पहुँचाने में विफल रही।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

चाईबासा पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के अधिकारियों ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। पुलिस का कहना है कि नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन क्लीन' जारी है, लेकिन नक्सलियों द्वारा बेतरतीब ढंग से बिछाए गए बमों के कारण रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन में भारी चुनौतियां आती हैं। मृतकों के परिजनों को सरकारी प्रावधानों के अनुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।