Vande Bharat Train Owner: सरकारी या प्राइवेट? जानें कौन है वंदे भारत का असली मालिक और कैसे जुटाया जाता है अरबों का फंड

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नई दिल्ली। भारतीय पटरियों पर दौड़ती सफेद और नीले रंग की 'वंदे भारत' (Vande Bharat Express) आज आधुनिक भारत की नई पहचान बन चुकी है। अपनी रफ्तार और वर्ल्ड क्लास सुविधाओं के कारण यह ट्रेन हर किसी का ध्यान खींचती है। लेकिन इस ट्रेन की लोकप्रियता के साथ-साथ एक सवाल अक्सर लोगों के मन में कौंधता है-क्या वंदे भारत किसी प्राइवेट कंपनी की है? क्या इसे सरकार नहीं बल्कि कोई कॉर्पोरेट घराना चलाता है? आइए, आसान भाषा में समझते हैं इस हाई-टेक ट्रेन के मालिकाना हक और इसके पीछे के 'फाइनेंस मॉडल' का पूरा सच।

मालिकाना हक: किसके पास है वंदे भारत की चाबी?

सोशल मीडिया पर चलने वाली तमाम चर्चाओं के उलट, वंदे भारत का असली और इकलौता मालिक 'भारतीय रेलवे' (Indian Railways) है। यह पूरी तरह से भारत सरकार के अधीन है। इसका रूट तय करने से लेकर, टिकट की दरें (Fare) निर्धारित करने और इसके संचालन की पूरी जिम्मेदारी रेल मंत्रालय की है। यह कोई प्राइवेट ट्रेन नहीं है, बल्कि 'मेक इन इंडिया' के तहत भारतीय इंजीनियरों द्वारा तैयार की गई एक सरकारी संपत्ति है। इस ट्रेन के कोच चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किए जाते हैं।

अरबों का खर्च: सरकार के पास कहाँ से आता है इतना पैसा?

वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेन बनाना और पटरियों का जाल बिछाना बेहद खर्चीला काम है। रेलवे को हर साल नई ट्रेनें खरीदने, पुराने कोच बदलने और स्टेशनों को वर्ल्ड क्लास बनाने के लिए अरबों रुपये की जरूरत होती है। इतना बड़ा फंड सीधे बजट से निकालना मुश्किल होता है। यहीं पर एंट्री होती है IRFC यानी इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन की। इसे आप आसान भाषा में रेलवे का अपना 'पर्सनल बैंक' या फाइनेंस पार्टनर कह सकते हैं।

IRFC का रोल: कैसे होती है नई ट्रेनों की फंडिंग?

IRFC सीधे तौर पर जनता से नहीं जुड़ता, बल्कि यह मार्केट से पैसा जुटाने का काम करता है। यह कंपनी बॉन्ड्स और डिबेंचर्स के जरिए बड़े निवेशकों और संस्थानों से पैसा उधार लेती है। इसी पैसे से वंदे भारत जैसी ट्रेनों के इंजन और कोच खरीदे जाते हैं।

लीज मॉडल का गणित:

IRFC बाजार से पैसा जुटाकर ट्रेन और अन्य एसेट्स खरीदता है।

इसके बाद वह इन ट्रेनों को भारतीय रेलवे को 'लीज़' (किराए) पर दे देता है।

भारतीय रेलवे इन ट्रेनों को चलाता है और बदले में IRFC को किस्तों में किराया चुकाता है।

इस मॉडल से सरकार पर एक साथ बड़ा वित्तीय बोझ नहीं पड़ता और विकास कार्य भी नहीं रुकते।

वंदे भारत: सिर्फ ट्रेन नहीं, आत्मनिर्भर भारत का गर्व

वंदे भारत का सफर केवल एक शहर से दूसरे शहर तक का सफर नहीं है। यह ट्रेन इस बात का सबूत है कि भारत अब ट्रेन तकनीक के लिए विदेशों पर निर्भर नहीं है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनी यह ट्रेन आज विदेशों को भी निर्यात किए जाने की तैयारी में है। जब आप इस ट्रेन में सफर करते हैं, तो याद रखें कि आप भारतीय रेलवे की अपनी ट्रेन में बैठे हैं, जो देश के गौरव और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का जीता-जागता उदाहरण है।