GST Council 56th Meeting: आम आदमी की लगी लॉटरी! सोलर पैनल से लेकर बिजली के सामान तक हुए सस्ते, जानें आपकी जेब पर कितना होगा असर

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नई दिल्ली। बढ़ती महंगाई के बीच केंद्र सरकार ने आम आदमी को राहत देने के लिए एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला है। 56वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में लिए गए ऐतिहासिक फैसलों ने मध्यम वर्ग के लिए बचत की नई राह खोल दी है। सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी (अक्षय ऊर्जा) सेक्टर को जोरदार बूस्टर डोज देते हुए सोलर और विंड एनर्जी से जुड़े उपकरणों पर टैक्स की दरों में भारी कटौती की है। यह कदम न केवल बिजली बिलों को कम करेगा, बल्कि भारत को 'ग्रीन एनर्जी' हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

सोलर एनर्जी हुई सुपर सस्ती: 12% से घटकर 5% हुआ टैक्स

बैठक में सबसे बड़ा फैसला क्लीन एनर्जी प्रोडक्ट्स को लेकर लिया गया है। अब सोलर पैनल, सोलर कुकर, फोटोवोल्टेइक सेल्स और सोलर वॉटर हीटर जैसे उपकरणों पर जीएसटी की दर को 12% से घटाकर मात्र 5% कर दिया गया है। ये नई दरें 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है—हर घर की छत पर सोलर पैनल पहुंचाना। इससे मध्यम वर्ग के परिवारों को महंगे बिजली बिलों से स्थायी मुक्ति मिलेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।

मध्यम वर्ग की बड़ी बचत: समझें गणित

टैक्स में इस कटौती का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि आप अपने घर के लिए 1 लाख रुपये का सोलर सिस्टम लगवाते थे, तो पहले आपको 12,000 रुपये जीएसटी देना पड़ता था। लेकिन अब 5% की दर से आपको केवल 5,000 रुपये ही टैक्स देना होगा। यानी सीधे तौर पर 7,000 रुपये की बचत। बड़े इंस्टॉलेशन और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स में यह बचत लाखों में होगी, जिससे छोटे उद्योगों और किसानों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

इनवर्टेड ड्यूटी का समाधान: इंडस्ट्री को बड़ी राहत

टैक्स दरों में बदलाव के साथ एक तकनीकी चुनौती 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' की थी, जहाँ कच्चे माल पर टैक्स अधिक और तैयार माल पर कम हो गया था। इससे कंपनियों का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) फंसने का डर था। हालांकि, सरकार ने उद्योग जगत को भरोसा दिया है कि रिफंड की प्रक्रिया को 'सुपरफास्ट' बनाया जाएगा। इससे कंपनियों के पास नकदी (Cash Flow) की कमी नहीं होगी और बाजार में क्लीन एनर्जी प्रोडक्ट्स की सप्लाई सुचारू रूप से बनी रहेगी।

सरल हुआ जीएसटी स्लैब: रोजमर्रा का सामान भी होगा सस्ता

काउंसिल ने केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे जीएसटी ढांचे को सरल बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब अधिकांश वस्तुओं को 5% और 18% के स्लैब में लाने की कोशिश की गई है। इसका सीधा फायदा घर के बजट पर पड़ेगा। मक्खन, घी, शैंपू और टीवी-एसी जैसे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स सामान की कीमतों में स्थिरता या कमी देखने को मिलेगी। वहीं, लग्जरी और हानिकारक वस्तुओं (सिन गुड्स) पर 40% का टैक्स बरकरार रखा गया है।